जानिए क्यों विधायकों के अयोग्य घोषित होते ही मुख्य चुनाव आयुक्त की मंशा पर उठे सवाल
विधायकों की सदस्यता रद्द होने की खबर से तिलमिलाई आप
- मुख्य चुनाव आयुक्त पर किया हमला, आयोग की कार्यप्रणाली को बताया संदिग्ध
- लगाया आरोप, बगैर विधायकों को सुने आयोग ने सुना दिया अपना फैसला
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चुनाव आयोग से 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने की खबर पर आम आदमी पार्टी (आप) तिलमिला गई है। पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया है। आप का कहना है कि सेवानिवृत्त होने के एक दिन पहले गुजरात काडर के अधिकारी रहे मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त की मंशा संदेह के घेरे में है।
इस फैसले ने आयोग को ही संदिग्ध बना दिया है। वहीं, पार्टी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी डाली है। लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग की रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजने की खबर आने के बाद आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अभी पार्टी को इसकी कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है।
हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पहले सिर्फ यही कहा था कि यह लोग कभी लाभ के पद पर थे या नहीं। कोर्ट ने माना है कि ये लोग संसदीय सचिव नहीं थे। ऐसे में इन पर कार्रवाई कैसे हो सकती है।
चुनाव आयोग पर हमला करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आयोग ने आज तक आप विधायकों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला बोलते हुए भारद्वाज ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को गिरवी रखकर एके जोती प्रधानमंत्री का कर्ज चुका रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीन आयुक्तों ने सुनवाई की थी, लेकिन दो ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। अब वह रिटायर होने से एक दिन पहले आप विधायकों की सदस्यता रद्द करने का फैसला सुना रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि जब लाभ के पद में कोई लाभ हुआ ही नहीं, तो सदस्यता रद्द करने की वजह क्या है। आयोग का फैसला पूरी तरह गलत है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के सलाहकार नागेंद्र शर्मा का कहना है कि इस मामले में चुनाव आयोग ने आप का पक्ष नहीं सुना।
एक आदमी के लालच से खत्म हुई सदस्यता : कपिल मिश्रा
आयोग के इतिहास में यह पहला मामला होगा, जिसकी मेरिट के आधार पर सुनवाई नहीं हुई। इस मामले में भाजपा को घसीटते हुए नागेंद्र शर्मा का कहना है कि भाजपा अपने एजेंटों के जरिए चुनाव आयोग की गरिमा को दांव पर लगा रही है।
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आयोग के फैसले पर कहा कि पूरा मामला एक आदमी की लालच का नतीजा है। इससे 20 विधायकों की सदस्यता खत्म हुई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए मिश्रा ने कहा कि वह बिल्कुल अंधे हो गए हैं।
इसका खामियाजा 20 विधायकों को चुकाना पड़ा। मिश्रा का दावा है कि इनमें से कोई भी विधायक पद मांगने के लिए केजरीवाल के पास नहीं गया था। लेकिन केजरीवाल चाहते थे कि सरकार के पैसे से विधायकों को दफ्तर, गाड़ी, वेतन व घर दिए जाएं।
बाद में इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल करके दूसरे राज्यों में पार्टी का जनाधार बनाया जाए। मिश्रा ने तंज कसा कि जो लोग सेवक बनने आए थे, वह मालिक बनकर बैठ गए हैं। उपचुनाव में सभी बीस सीटों पर आप की जमानत जब्त होगी।