क्यों एम्स ने नहीं ली संजीव चतुर्वेदी द्वारा दान की गई पुरस्कार राशि
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एम्स जैसे सरकारी चिकित्सीय संस्थान में भी आर्थिक रुप से कमजोर मरीज अपनी बीमारी का इलाज नहीं करा पाते और एम्स-प्रशासन भी ऐसे मरीजों का इलाज बिना पैसे के करने में असमर्थतता जता चुका है।
ऐसे ही गरीब मरीजों के इलाज के लिए एम्स के डिप्टी सेक्रेटरी संजीव चतुर्वेदी ने रमण मैग्सेसे अवॉर्ड के तहत मिली राशि करीब 20 लाख रुपये गरीब मरीजों के इलाज के लिए एम्स को दान की दी थी लेकिन एम्स ने इस राशि को लेने से इनकार कर दिया है।
जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने संजीव को इस रकम को राष्ट्रीय आरोग्य निधि में दान करने के लिए कहा है। एम्स और संजीव चतुर्वेदी के बीच शह-मात जैसा खेल पिछले करीब एक वर्ष से लगातार जारी है।
अब आरोग्य निधि में स्थानांतरित कर दी जाएगी राशि
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निदेशक की ओर से एम्स निदेशक डॉ. एम सी मिश्रा को पत्र लिखकर कहा गया है कि संजीव चतुर्वेदी की ओर से दान दी गई राशि एम्स की जगह राष्ट्रीय आरोग्य निधि में स्थानांतरित कर दी जाए।
मामले में संजीव चतुर्वेदी की ओर से कहा गया है कि अपनी ओर से अवॉर्ड की राशि एम्स को दान कर दी है और अब वो उस राशि जो आरोग्य निधि में डाल दें तब भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
लेकिन तकलीफ जरूर है कि एम्स में गरीब मरीज इलाज के लिए आते हैं तो उन्हें पैसे की कमी की वजह से इलाज नहीं मिल पाता और एम्स इस रकम को लेने से इनकार कर रहा है।
अपने कर्मचारी की ओर से दी गई दान राशि से इंकार
पिछले दिनों वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एम्स को इनकम टैक्स की एक्ट 80 जी के तहत राहत प्रदान की थी। इस राहत के बाद एम्स को दान दी गई रकम पर शत प्रतिशत की इनकम टैक्स से छूट मिलती है।
इसके बाद एम्स की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया था कि वित्त मंत्रालय के इस फैसले से एम्स में दान को बढ़ावा मिलेगा और इलाज से रिसर्च तक में लाभ मिलेगा।
लेकिन एम्स ने अपने ही कर्मचारी की ओर से दान दी गई राशि को लेने से इनकार कर दिया है।