संकल्प पास कराने के पीछे किसकी राजनीति, कार्रवाई से बच रही पार्टी
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पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की मांग संबंधी दिल्ली विधानसभा में पारित संकल्प से उठे विवाद को भले आप सुलझाने का दावा कर रही है, लेकिन कई सवाल अनसुलझे हैं, जिनका जवाब किसी के पास नहीं।
सवाल है कि पार्टी हाईकमान की बिना इजाजत संकल्प में राजीव गांधी का नाम कैसे व किसने जोड़ा? इस गंभीर चूक के बावजूद आप संबंधित विधायक के खिलाफ कार्रवाई से क्यों बच रही है? अलका लांबा पर देर रात्रि त्यागपत्र का दबाव डालने के बाद ऐसा क्या हो गया कि पार्टी को कहना पड़ा कि अलका से त्यागपत्र नहीं मांगा गया है।
लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। पूरा विपक्ष महागठबंधन बनाने की जुगत में है। कांग्रेस का एक धड़ा आप से गठबंधन के पक्ष में है तो दूसरा विरोधी। समय-समय पर इसके कयास लगाए जाते रहे हैं। अब लगने लगा था कि गठबंधन तय है।
84 दंगों के मामले में पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्र कैद मिलने के बाद राजनीति गर्मा गई है और रोज नए समीकरण बन रहे हैं। ऐसे में राजीव गांधी को दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराने व उनके भारत रत्न वापस लेने की मांग के संकल्प ने सभी समीकरण बदल दिए हैं।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भी नहीं पता था कि संकल्प में राजीव गांधी का नाम जोड़ा गया है। संकल्प मात्र दंगों की निंदा के लिए ही लाया जाना था।
एक विधायक ने हाथ से संकल्प में राजीव गांधी का नाम जोड़कर विधायक जरनैल सिंह को सौंपा और उन्होंने भी उत्साह में उसे पढ़ दिया। सदन में विपक्ष की आवाज न के बराबर है। ऐसे में सभी विधायकों ने उस पर हामी भर दी। विपक्ष तो पहले से ही यह मांग कर रहा था।
संकल्प पास होने का पता चलते ही हंगामा हो गया। आप ने रातभर डैमेज कंटोल के लिए सभी को लगा दिया, लेकिन तीर कमान से निकल चुका था। इसके बाद अलका लांबा से त्यागपत्र मांग लिया गया। रात को ही लगने लगा था कि अलका से त्यागपत्र लेना आसान नहीं है। आप का एक धड़ा पूरी तरह अलका लांबा के पक्ष में खड़ा है और कई वरिष्ठ नेता भी उनसे त्यागपत्र लेने के विरोध में आ गए।
बताया जाता है कि गठबंधन के पक्षधर कांग्रेस नेताओं ने भी आप नेताओं को अपनी नाराजगी से अवगत करा दिया। सूत्रों के अनुसार, इसी के बाद तय किया गया कि किसी भी विधायक से त्यागपत्र न मांगा जाए, बल्कि इस मामले को यही खत्म करने की कोशिश की जाए। अलका को तेजतर्रार नेता माना जाता है। वह कांग्रेस छोड़कर ही आप में शामिल हुई थीं। आज भी कई कांग्रेस नेता उनके प्रति सहानुभूति रखते हैं।