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कौन हैं वसीम रिजवी, जिन्होंने बार-बार की अयोध्या में राम मंदिर बनाने की वकालत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 06 Dec 2018 02:57 PM IST
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वसीम रिजवी
- फोटो : amar ujala
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कट्टर मुस्लिम समाज में अपनी नकारात्मक छवि के लिए सुर्खियां बटोरने वाले वसीम रिजवी राम मंदिर पर अपने विचार को अब सिनेमा के माध्यम से पूरे देश में पहुंचाने जा रहे हैं। इन दिनों वसीम रिजवी अयोध्या राम मंदिर को लेकर बनने वाली अपनी फिल्म की वजह से खूब चर्चा में हैं। हालांकि उनके इस फिल्म को लेकर कई जगह विरोध की भी आवाजें उठ रही हैं। जानिए कौन हैं वसीम रिजवी और कैसा रहा उनका अब तक सफर..
अयोध्या के विवादित ढांचे की बात करें या तीन तलाक की या फिर मदरसों को बंद करने की एक व्यक्ति अपने बयानों के कारण हमेशा ही चर्चा में रहता है। ये हैं उत्तर प्रदेश शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी। यह एक ऐसे मुस्लिम हैं जो कई मुद्दों पर कथित रूप से प्रगतिशील विचार रखते हैं।
इनके बयान हमेशा से ही मीडिया में सुर्खियां बनते हैं। चाहे बाबरी मस्जिद की बात हो या तीन तलाक की या फिर मदरसों में शिक्षा की रिजवी के कड़वे बयान लोगों को विचार करने पर मजबूर कर देते हैं। लेकिन उनके विचार निजी है या राजनीति से प्रभावित इस पर खुलकर नहीं कहा जा सकता है।
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शिया वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर बैठे रिजवी उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी अहम भूमिका निभाते हैं। देशभर में मुसलमानों की कुल आबादी में बीस प्रतिशत शिया मुसलमान और बाकी सुन्नी हैं। शिया मुस्लिमों में रिजवी अच्छी पैठ रखते हैं। फिलहाल वसीम रिजवी अयोध्या मुद्दे पर बनी अपनी फिल्म को लेकर विवादों में हैं। इस फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद से ही कट्टरपंथी उन्हें निशाना बना रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
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अयोध्या के विवादित ढांचे की बात करें या तीन तलाक की या फिर मदरसों को बंद करने की एक व्यक्ति अपने बयानों के कारण हमेशा ही चर्चा में रहता है। ये हैं उत्तर प्रदेश शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी। यह एक ऐसे मुस्लिम हैं जो कई मुद्दों पर कथित रूप से प्रगतिशील विचार रखते हैं।
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इनके बयान हमेशा से ही मीडिया में सुर्खियां बनते हैं। चाहे बाबरी मस्जिद की बात हो या तीन तलाक की या फिर मदरसों में शिक्षा की रिजवी के कड़वे बयान लोगों को विचार करने पर मजबूर कर देते हैं। लेकिन उनके विचार निजी है या राजनीति से प्रभावित इस पर खुलकर नहीं कहा जा सकता है।
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शिया वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर बैठे रिजवी उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी अहम भूमिका निभाते हैं। देशभर में मुसलमानों की कुल आबादी में बीस प्रतिशत शिया मुसलमान और बाकी सुन्नी हैं। शिया मुस्लिमों में रिजवी अच्छी पैठ रखते हैं। फिलहाल वसीम रिजवी अयोध्या मुद्दे पर बनी अपनी फिल्म को लेकर विवादों में हैं। इस फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद से ही कट्टरपंथी उन्हें निशाना बना रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
विवादों के साथ रहा पुराना नाता
रिजवी और विवाद साथ-साथ चलते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मदरसों को बंद करने की बात की और कहा कि इन जगहों पर आतंकवाद पैदा होता है। हालांकि सरकार ने उनके इस अनुरोध को ठुकरा दिया और कहा कि मदरसों का देश के विकास में एक अहम योगदान है।
लेकिन, इसके बाद भी रिजवी का मदरसों को लेकर विरोध जारी है और वो कहते हैं कि मुल्ला और मौलवी अपने बच्चों को मदरसों में क्यों नहीं पढ़ाते हैं, उनके बच्चे तो अच्छे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। ये गरीब मुस्लिम बच्चों को अपने यहां रखते हैं और आर्थिक लाभ के लिए उनका उपयोग करते हैं। उनके अनुसार यह समस्या सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरे विश्व में फैली हुई है।
हालांकि कई मुस्लिम संगठन वसीम रिजवी पर भी सवाल खड़े कर चुके हैं और उनके ऊपर बोर्ड में भ्रष्टाचार करने के आरोप भी लगे हैं। कभी समाजवादी पार्टी से उनके अच्छे संबंध माने जाते थे और आज कहा जाता है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी का समर्थन प्राप्त है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम समुदाय अहम भूमिका अदा करता है और इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वो इस तरह के बयान अपने राजनीतिक फायदे के लिए देते हों।
लेकिन, इसके बाद भी रिजवी का मदरसों को लेकर विरोध जारी है और वो कहते हैं कि मुल्ला और मौलवी अपने बच्चों को मदरसों में क्यों नहीं पढ़ाते हैं, उनके बच्चे तो अच्छे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। ये गरीब मुस्लिम बच्चों को अपने यहां रखते हैं और आर्थिक लाभ के लिए उनका उपयोग करते हैं। उनके अनुसार यह समस्या सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरे विश्व में फैली हुई है।
हालांकि कई मुस्लिम संगठन वसीम रिजवी पर भी सवाल खड़े कर चुके हैं और उनके ऊपर बोर्ड में भ्रष्टाचार करने के आरोप भी लगे हैं। कभी समाजवादी पार्टी से उनके अच्छे संबंध माने जाते थे और आज कहा जाता है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी का समर्थन प्राप्त है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम समुदाय अहम भूमिका अदा करता है और इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वो इस तरह के बयान अपने राजनीतिक फायदे के लिए देते हों।
वसीम रिजवी का अब तक का सफर
वसीम रिजवी एक सामान्य परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता रेलवे के कर्मचारी थे लेकिन जब रिजवी क्लास 6 की पढ़ाई कर रहे थे तो उनके वालिद का इंतकाल हो गया। इसके बाद रिजवी और उनके भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनकी वालदा पर आ गई। रिजवी अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा हासिल की और आगे की पढ़ाई के लिए नैनीताल के एक कॉलेज में प्रवेश लिया। लेकिन, पारिवारिक परिस्थितियां खराब होने के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
इसके बाद वो सऊदी अरब चले गए और एक होटल में काम करने लगे। बाद में उन्हें जापान जाने का मौका मिला और वहां उन्होंने एक फैक्ट्री में काम किया। इसके बाद उनको अमेरिका में काम करने का मौका मिला जहां उन्होंने एक स्टोर में काम किया। लेकिन, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें भारत लौटना पड़ा और यहां उन्होंने ट्रेडिंग का काम करना शुरू कर दिया।
जब उनके सामाजिक संबंध अच्छे होने लगे तो उन्होंने नगर निगम का चुनाव लड़ने का फैसला किया। यहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरूआत हुई। इसके बाद वो वक्फ बोर्ड के सदस्य बने और उसके बाद चेयरमैन के पद तक पहुंचे। वो पिछले दस सालों से बोर्ड में है और लगातार बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं।
इसके बाद वो सऊदी अरब चले गए और एक होटल में काम करने लगे। बाद में उन्हें जापान जाने का मौका मिला और वहां उन्होंने एक फैक्ट्री में काम किया। इसके बाद उनको अमेरिका में काम करने का मौका मिला जहां उन्होंने एक स्टोर में काम किया। लेकिन, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें भारत लौटना पड़ा और यहां उन्होंने ट्रेडिंग का काम करना शुरू कर दिया।
जब उनके सामाजिक संबंध अच्छे होने लगे तो उन्होंने नगर निगम का चुनाव लड़ने का फैसला किया। यहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरूआत हुई। इसके बाद वो वक्फ बोर्ड के सदस्य बने और उसके बाद चेयरमैन के पद तक पहुंचे। वो पिछले दस सालों से बोर्ड में है और लगातार बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं।