दिल्ली चिड़ियाघरः सफेद बाघ नजरबंद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डॉक्टर पनीरसेल्वन का कहना है कि युवक को मारने के बाद भी इस बाघ को आदमखोर नहीं कहा जा सकता क्योंकि उसने युवक को खाया नहीं है।
उनके मुताबिक, "बाघ ने सिर्फ अहाते में कूदने वाले युवक पर हमला किया और उसे मार दिया। मगर वो आदमखोर नहीं है। आदम खोर तब कहा जा सकता था जब वो उसे मारकर खा गया होता।"
उन्होंने बताया, "इस बाघ को बना बनाया खाना खाने की आदत है। वो चिड़ियाघर में ही पैदा हुआ है। अगर जंगल में पैदा हुआ होता तो उसमें वैसे गुण आते।"
चिड़ियाघर में काम वाले लोगों ने भी उस वक़्त शोर सुना जब युवक बाघ के बाड़े में जा गिरा। उन्होंने बताया कि जैसे ही युवक बाघ के अहाते में गिरा, चारों तरफ अफरा तफरी मच गई थी।
आकर्षण केंद्र रहा है ये सफेद बाघ
यहीं पर तैनात सुरक्षाकर्मी धर्मदास बताते हैं कि लोगों में जंगली जानवरों को उत्तेजित करने की प्रवृति भी ऐसी घटना का एक बड़ा कारण है।
चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि सभी जानवरों के आहते बेहद सुरक्षित हैं और यह दुर्घटना लोगों की अपनी ग़लती की वजह से घटी है।
जिस सफेद बाघ, विजय ने मंगलवार को एक युवक को मारा है उसके पूर्वजों को मध्य प्रदेश के रीवा के जंगलों से 1951 में लाया गया था। विजय सैलानियों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा है।
घटना के बाद उसे पिंजरे में बंद कर दिया गया है और चिड़ियाघर प्रशासन उसे लेकर फिलहाल ज़्यादा एहतियात बरत रहा है।
आदमखोर नहीं है चिड़ियाघर का बाघ
दिल्ली के चिड़ियाघर में उस सफेद बाघ को फिलहाल नजरबंद कर दिया गया है जिसने मंगलवार को अपने अहाते में कूदे एक युवक को मार डाला था।
हालांकि चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि इस बाघ के आदमखोर बनने के संकेत नहीं हैं और उसे तीन-चार दिन तक निगरानी में ही रखा जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर मौजूद गार्ड ने युवक को रोकने की कोशिश की लेकिन वो बाघ के बाड़े में जा गिरा।
चिड़ियाघर के अधिकारी और पशु विशेषज्ञ डॉक्टर एन पनीरसेल्वन ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है, "पहले जाली, फिर बाड़ और फिर अहाते की दीवार को युवक पार करता चला गया। वहां पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने उसे रोकने की कोशिश भी की। मगर वो नहीं माना।"