'मेरे दफ्तर में कूड़ा फेंकने से अगर वेतन मिलता है तो ढेर लगा दो'
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर एमसीडी को भंग करके चुनाव कराने की मांग की है। केजरीवाल ने लिखा है कि एक ऐसी संस्था के प्रबंधन को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं जो अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दे सकता।
इससे कुछ ही मिनट पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दिल्ली सरकार ने तीनों एमसीडी को कर्मचारियों के 12 महीने के वेतन का भुगतान कर दिया है। तीनों मेयर बताएं कि पैसा कहां गया?
सिसोदिया ने कहा कि एक साल में 4 बार सफाई कर्मचारी हड़ताल कर चुके हैं। उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है। न सिर्फ सरकार वेतन का 12 महीने का पैसा एमसीडी को दे चुकी बल्कि योजना मद की कुछ राशि भी एमसीडी ने वेतन के लिए डायवर्ट (मद बदलना) कर लिया है।
भाजपा कर्मचारियों को भड़काकर कूड़े की राजनीति कर रही है
तो फिर कर्मचारियों को वेतन क्यों नहीं दिया? वो घर कैसे चलाएं पैसा कहां गया? ये लोग कूड़े पर पॉलिटिक्स कर रहे हैं। भाजपा कर्मचारियों को भड़काकर कूड़े की राजनीति कर रही है। मेरे दफ्तर में कूड़ा फेंकने से अगर वेतन मिलता है तो ढेर लगा दो।
सिसोदिया ने कहा डीडीए केपास 1255 करोड़ रुपये का बकाया है, वो मांगने नहीं जाते और बार-बार दिल्ली सरकार केपास भेज देते हैं। एमसीडी के जो चुने हुए भाजपा के लोग हैं, वो एमसीडी नहीं चला पा रहे हैं।
कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे, दिल्ली को साफ नहीं रख पा रहे तो उन्हें एमसीडी में बने रहने का कोई अधिकार नहीं। हमारी केंद्र सरकार से अपील है कि एमसीडी को भंग करके चुनाव कराएं।
भाजपा नेता हमारे घर-दफ्तर के बाहर कूड़ा फिंकवा रहे हैं
दिल्ली की कूड़ा राजनीति और बिगड़ी दशा को लेकर मनीष सिसोदिया ने कहा है कि महापौर और आयुक्तों से लगातार संपर्क में हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि जो कर्मचारी काम पर आएं, उन्हें दिक्कत न हो। इसके लिए दिल्ली सरकार के अधिकारी एमसीडी आयुक्तों और पुलिस अधिकारियों के संपर्क में हैं।
सिसोदिया ने कहा कि मेरी भाजपा के एमसीडी में चुने हुए नेताओं से अपील है कि कर्मचारियों को तनख्वाह दीजिए। बताएं कि दिल्ली सरकार ने जो 12 महीने के वेतन का पैसा दिया, कहां गया? दिल्ली सरकार ने अपनी सारी देनदारी चुका दी है।
कोई पैसा बकाया नहीं है। फिर भी कर्मचारियों को भाजपा नेता भड़काकर, हमारे घर-दफ्तर के बाहर कूड़ा फिंकवा रहे हैं।