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'कब खत्म हुआ लोकपाल का मेरा कार्यकाल'

Thu, 02 Apr 2015 05:58 PM IST
Updated Thu, 02 Apr 2015 05:58 PM IST
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when my term as Lokpal finished

आम आदमी पार्टी में फिर एक नया विवाद सामने आया है। पार्टी के लोकपाल पद से हटाए जाने के बाद एडमिरल रामदास ने पार्टी पर हमला बोलते हुए कई सवाल उठाए हैं।

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उन्होंने पूछा है कि उनका कार्यकाल कब खत्म हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता को लिखे ई-मेल में कई अन्य सवाल पूछे हैं। यह खुलासा रामदास के ई-मेल लीक होने के बाद हुआ है।
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राष्ट्रीय सचिव को लिखे पत्र में रामदास ने पूछा है कि पार्टी सबसे पहले यह बताए कि उनका कार्यकाल कब खत्म हुआ। अगर उनका कार्यकाल 2013 में खत्म हो गया था तो लोकसभा चुनाव के दौरान मार्च-अप्रैल 2014 में यूपी-हरियाणा के कुछ उम्मीदवारों की जांच उनसे कराई गई, क्या वह कानूनी थी।

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इसलिए कर रहे थे पार्टी के लिए काम

when my term as Lokpal finished

रामदास ने कहा कि पार्टी जनवरी 2015 में दिल्ली चुनाव के लिए 12 उम्मीदवारों की जांच का काम भी उन्हें दिया और उन्होंने यह काम पर्चा भरने के समय से पहले पूरा किया।


अपने ई-मेल में उन्होंने लिखा है कि मैं चकित हूं, हतप्रभ हूं और ये मेरी समझ से परे है। रामदास के मुताबिक उनका कार्यकाल नवंबर 2013 से तीन साल बढ़ाकर नवंबर 2016 तक कर दिया गया होगा, इसलिए वह पार्टी के लिए काम करते रहे।

पार्टी ने कई मौकों पर उनके कामों की सराहना भी की है। इसलिए उन्हें हटाने से पहले और नए लोकपाल की नियुक्ति के लिए पार्टी को सूचना जरूर देनी चाहिए थी।

लेकिन पार्टी की इन सारी गतिविधियों का पता मीडिया से चला। बता दें कि रामदास लोकपाल के पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी को ई-मेल के जरिए अपनी आपत्ति जाहिर कर रहे थे। जिसके बाद वह मेल मीडिया में लीक हो गया।

कानूनी लड़ाई भी लड़ सकते हैं योगेंद्र

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आम आदमी पार्टी से असंतुष्ट नेता योगेंद्र यादव आगे का रास्त तय करने के लिए जनता के बीच जाएंगे। प्रशांत भूषण के साथ मिलकर नई पार्टी बनाने का संकेत देने के साथ वह जनता की राय भी लेंगे।

इस बीच उनका आप से निकाला जाना कितना संवैधानिक है इस लेकर वह कानूनी रास्ता भी देख रहे है। योगेंद्र यादव ने केजरीवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं और प्रशांत आंदोलन के नैतिक पतन को देखते हुए मुकदर्शक नहीं बने रह सकते थे।

हम नहीं चाहते थे हम पर जनता के ऐसे आरोप लगे। इसलिए हमने समय-समय पर आवाज उठाई। हमारे पास दो विकल्प थे।

योगेंद्र चाहते थे राजनीति में हो बदलाव

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एक हम एकता को बनाए रखने के लिए चुप रहते या फिर आंदोलन के आत्मा को बचाए रखने के लिए व लोगों की उम्मीद को बचाए रखने के लिए आवाज उठाते।

यह दुविधा थी मगर इस बीच आवाज उठी अब सबकुछ सामने है। राजनीति छोड़ने की बात पर उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र कमजोर होगा।

हम आप में रहकर राजनीति में बदलाव करना चाहते थे लेकिन वह नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हम किसी भी नतीजे पर जाने से पहले लोगों की राय जरूर लेना चाहेंगे। वह क्या चाहते हैं। हम स्वराज के मॉडल पर ही आगे बढ़ेंगे।

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