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हारे तो किरण से वकीलों की नाराजगी भी होगी अहम

Sun, 08 Feb 2015 12:41 AM IST
Updated Sun, 08 Feb 2015 12:41 AM IST
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when lose bjp it is a main factor of lawyers resentment against kiran

विधान सभा चुनाव में मतदान के रुझान को देखें तो आने वाले दिन दिल्ली में भाजपा के लिए अच्छे नहीं होंगे। अगर भाजपा दिल्ली में भारी अंतर से चुनाव हारती है तो इसमें राजधानी के वकीलों की नाराजगी भी एक अहम कारण होगा। राजधानी के वकील शुरुआत से ही मुख्यमंत्री पद पर किरण बेदी की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे थे।

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गौरतलब है कि किरण को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद तीस हजारी कोर्ट में वर्ष 1988 में वकीलों पर लाठीचार्ज की घटना के खिलाफ एकजुट होकर वकीलों ने किरण बेदी के पुतले फूंकने शुरू कर दिए।

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वकीलों ने तीस हजारी, कड़कड़डूमा अदालतों में पुतले फूंके थे। जिस दिन पूर्वी दिल्ली में प्रधानमंत्री की रैली थी उस दिन भी किरण बेदी का पुतला फूंका गया। राजधानी के करीब डेढ़ लाख वकीलों ने अपने मुव्वकिलों व जान-पहचान वाले लोगों से किरण बेदी का विरोध करने का आह्वान किया था।

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सामूहिक रूप से नाराजगी रही वकीलों में

when lose bjp it is a main factor of lawyers resentment against kiran

शाहदरा बार के अध्यक्ष अरुण शर्मा का कहना है कि अगर किसी वकील ने बेदी का समर्थन किया है तो यह उसका व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है। सामूहिक रूप से वकीलों ने बेदी के कारण भाजपा का विरोध किया है। राजधानी में करीब डेढ़ लाख वकील हैं इनमें आधे से ज्यादा वकीलों ने बेदी और भाजपा दोनों का विरोध किया है। चुनाव बाद एग्जिट पोल भी यह दर्शा रहे हैं।

वकीलों को एकजुट करने वाले हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव खोसला ने ‘आप’ के पक्ष में हुए भारी मतदान पर खुशी जाहिर की। उनके मुताबिक वकीलों व दूसरे मतदाताओं ने काफी समझदारी से वोट दिया है। उन्होंने इस बात को माना कि किरण बेदी को दिल्ली का मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए।

दिल्ली प्रदेश भाजपा विधि प्रकोष्ठ के संयोजक अधिवक्ता अनिल सोनी का दावा है कि वकीलों ने भाजपा के समर्थन में वोट दिया है। किरण बेदी का विरोध केवल वही वकील कर रहे हैं जो 1988 या उससे पहले से वकालत कर रहे हैं। उसके बाद आए वकीलों को उस प्रकरण की जानकारी तक नहीं है। प्रकोष्ठ संयोजक का दावा है कि भाजपा वकीलों को काफी हद तक मनाने में कामयाब रही है।

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