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जेएनयू विवादः हाईकोर्ट ने पूछा, जब कक्षाएं नहीं हुईं तो ऑनलाइन परीक्षाएं लेने का क्या उद्देश्य

Thu, 30 Jan 2020 06:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 30 Jan 2020 06:50 AM IST
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What is the purpose of taking online exams when classes are not done asked court
delhi high court

व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए परीक्षा लेने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रशासन से पूछा कि जब लंबे समय से कक्षाएं नहीं लगीं तो घर से ऑनलाइन परीक्षा लेने का क्या उद्देश्य है। जेएनयू के मानसून सेमेस्टर के लिए आनलाइन ओपन बुक या होम इक्जाम लेने के फैसले को छात्रों और जेएनयू के कई प्रोफेसरों ने चुनौती दी है। 

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कोर्ट ने इन याचिकाओं पर जेएनयू व अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। विश्वविद्यालय ने मानसून सेमेस्टर के लिए परीक्षाएं प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करके या उसे ई मेल से छात्रों को भेजकर और उत्तर पुस्तिकाएं ई मेल और व्हाट्एप के जरिए मंगाने का निर्णय लिया था। 
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न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने विश्वविद्यालय से सवाल किया कि कक्षाएं नहीं हुईं तो परीक्षाएं लेने का क्या उद्देश्य है? परीक्षाओं का उद्देश्य इसका मूल्यांकन करना होता है कि छात्रों ने क्या सीखा लेकिन पढ़ाई नहीं हुई तो उनका क्या मूल्यांकन किया जाएगा? क्या उनका मूल्यांकन इसके आधार पर होगा कि पुस्तकों में क्या लिखा है। 
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अदालत ने कहा कुलपति ने जिस शक्ति का इस्तेमाल किया वह इस उद्देश्य के लिए नहीं हो सकती। उनके पास जो शक्ति है वह अन्य उद्देश्यों के लिए है। कोर्ट ने जेएनयू के विभिन्न स्कूल और विशेष केन्द्रों के बोर्ड ऑफ स्टडीज से सुझाव मांगे कि मानसून सेमेस्टर की बाकी कक्षाएं कैसे हो सकती हैं और परीक्षाएं कैसे ली जाएं। कोर्ट ने यह सुझाव शैक्षणिक परिषद को भेजने और उसकी प्रति चार फरवरी को पेश करने का निर्देश दिया है। 

प्रोफेसर और छात्रों ने दायर की थी याचिका
कोर्ट के समक्ष जेएनयू के प्रोफेसरों और छात्रों की ओर से अधिवक्ता समीक्षा गोडियाल और अभिक चिमनी ने याचिका दायर कर 2019 मानसून सेमेस्टर के लिए अंतिम सेमेस्टर परीक्षाएं वैकल्पिक तरीके से कराने के निर्णय को चुनौती दी है। इन याचिकाओं में विश्वविद्यालय के उस सर्कुलर का भी विरोध किया गया है जिसमें प्रोफेसरों को वर्ष 2020 शीतकालीन सेमेस्टर के लिए कोर्स वर्क शुरू करने का निर्देश दिया गया है। 

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि जब विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूल और विशेष केंद्रों में पाठ्यक्रम पूरा नहीं किया गया है तो ऐसे हालात में जेएनयू के कुलपति को इस तरह की परीक्षाओं की इजाजत देने का अधिकार नहीं है। 


कोर्ट के समक्ष जेएनयू की ओर से केंद्र सरकार की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद ने कहा कि आनलाइन ओपन बुक या होम इक्जाम छात्रों की क्षमता को जांचते हैं और ये सामान्य होते हैं। विश्वविद्यालय अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करने को तैयार है लेकिन इसकी पूरी प्रक्रिया पर गौर करने से समय की बर्बादी होगी क्योंकि शीतकालीन सेमेस्टर शुरू हो चुका है। 

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