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आखिर ई-मेल में ऐसा क्या लिखा जो मचा इतना बवाल

Tue, 10 Mar 2015 02:08 PM IST
Updated Tue, 10 Mar 2015 02:08 PM IST
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What in wrote an e-mail which created controversy

भले ही आम आदमी पार्टी में चल रहे घमासान का खुलासा अब हुआ हो, लेकिन AAP की पक्की ईंटों से विश्वास की रेत महीनों पहले से धीरे-धीरे दरक रही थी। चिट्ठियां अब सामने आ रही हैं, लेकिन इनका खाका महीनों पहले खींचा जा चुका था।

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प्रशांत-योगेंद्र की चिट्ठियों के विवादों का अंत भी नहीं हुआ है कि एक और चिट्ठी सामने आई है जिसने कई नए सवाल पैदा कर दिए हैं। ये चिट्ठी है विवादों के भंवर जाल में फंसे प्रशांत भूषण की बहन की।

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प्रशांत भूषण की बहन शालिनी गुप्ता ने आप के ग्लोबल ग्रुप को ई-मेल के जरिए एक पत्र लिखा जिसमें अप्रत्यक्ष रुप से 800  एनआरआई समर्थकों को हतोत्साहित करने की कोशिश की गई।
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आखिर शालिनी ने क्या लिखा पत्र में

What in wrote an e-mail which created controversy

छिपे दौर पर पत्र में शालिनी चर्चा करती हैं कि आप सभी पार्टी के मजबूत कार्यकर्ता हो जो आर्थिक और व्यक्तिगत रूप से आप से जुड़े हुए हो। आप अपना वक्त पार्टी के लिए खर्च करते हो। शालिनी 5 और 6 जनवरी को दो पत्र लिखे गए, जिसमें उन्होंने दिल्ली चुनावों में पार्टी द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों को लेकर दो मुद्दों का जिक्र किया।

शालिनी ने 5 जनवरी को लिखे पत्र में कहा कि हमें अपनी-अपनी विधानसभा को काफी सोच-समझकर गोद लेना चाहिए। पार्टी के कई ऐसे उम्मीदवार हैं जो पार्टी की साफ विचारधारा से मैच नहीं खाते।

शालिनी ने 5 जनवरी को लिखे गए पत्र में भूषण द्वारा 12 उम्मीदवारों के खिलाफ लोकपाल को दी गई शिकायत की भी तारीफ की। जिसमें इंक्वायरी के बाद दो के टिकट काट दिए गए। हालांकि ये पत्र लोकपाल की जांच पूरी होने से पहले लिखे गए थे।

पार्टी बोली कि पत्र की थी पहले से जानकारी

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पार्टी सूत्रों के मुताबिक उन्होंने शालिनी द्वारा लिखे गए पत्रों की जानकारी थी, और वो शांतिपूर्वक इस मामले को निपटाने की कोशिशों में लगे हुए थे। हम इन सारे मामलों में उलझना नहीं चाहते थे, जिससे हमारा ध्यान बंटता, और वैसे भी वो वक्त चुनावों का था, और हम इन्हें बढ़ावा नहीं दे सकते थे।

शालिनी जी के अलावा भी कई और पार्टी विरोधी गतिविधियां चलती रहीं जिस पर हमारी नजर बनी थी। पार्टी के सूत्रों ने ये भी साफ किया कि इन पत्रों से उनके एनआआई समर्थकों पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा और ना ही उनके फंड में कोई कमी नहीं आई।

2013 के चुनावों की तरह ही इस बार भी हमें 30 प्रतिशत फंड इसी बाहर से ही मिला है। वहीं पार्टी के सिंगापुर से एनआरआई समर्थक दीपक का मानना है कि उन्होने ई-मेल पढ़े थे, लेकिन उनका उन पर कोई खास असर नहीं हुआ।

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