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बाबा हरदेव की मौत पर शोक की लहर, बुराड़ी लाया जाएगा पार्थिव शरीर

Sat, 14 May 2016 02:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 14 May 2016 02:38 AM IST
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 wave of grief over the death of Baba Hardev
बाबा की मृत्यु की सूचना पर दिल्ली स्थित निरंकारी मुख्यालय पर पहुंचे लोग - फोटो : अमर उजाला
निरंकारी बाबा हरदेव सिंह की शुक्रवार की सुबह कनाडा में सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने से उनके परिजन और अनुयायी गहरे सदमे है। उनके बीच शोक की लहर फैल गई है। बाबा की मौत की खबर मिलने के बाद से ही उनके अनुयायी रोते बिलखते हुए निरंकारी कॉलोनी पहुंच रहे हैं।
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बाबा हरदेव सिंह की मौत की खबर मिलने के बाद से ही निरंकारी कॉलोनी शोक में डूब गई है। बाबा के घर के अंदर और बाहर सभी लोगों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं। एक-दूसरे के गले लगकर वे दुख बांटने की कोशिश कर रहे हैं। खबर मिलने के बाद से ही बाबा के घर पर रिश्तेदारों के साथ-साथ अनुयायियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया।
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सबसे पहले बाबा की बहन घर पहुंची। घर में मौजूद बाबा की बेटी और बेटे को देखते ही वह बिलख पड़ी और उनको गले से लगा लिया। बुआ को देखकर बाबा की बेटी व बेटे के आंखों के आंसू टपकने लग गए। इसी बीच बाबा के घर पर रोते बिलखते हुए उनके अनुयायियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया।
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 wave of grief over the death of Baba Hardev
बाबा की मृत्यु की सूचना पर एक दूसरे को सांत्वना देते लोग - फोटो : अमर उजाला

36 वर्ष में 27 देशों तक मिशन को पहुंचाया

 

निरंकारी बाबा हरदेव सिंह का जन्म 23 फरवरी 1954 को दिल्ली में हुआ था। शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही वह वर्ष 1971 में निरंकारी सेवादल से जुड़ गए थे। वर्ष 1980 में पिता की मृत्यु के बाद निरंकारी मिशन के प्रमुख की कमान संभालने के बाद उसे देश-विदेश में आगे बढ़ाया। उन्होंने समाज सेवा का भी बड़ा बीड़ा उठाया हुआ था।

 

निरंकारी बाबा हरदेव सिंह की शुरुआती शिक्षा घर पर ही हुई थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की संत निरंकारी कॉलोनी  स्थित रोसरी स्कूल और पटियाला के एक बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई की। उच्च शिक्षा उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हासिल की। उन्होंने वर्ष 1971 में  निरंकारी सेवादल से जुड़ने के चार साल बाद वर्ष 1975 में फर्रूखाबाद की  सविंदर कौर से शादी की।


वर्ष 1980 में पिता की हत्या के बाद वे संत निरंकारी मिशन के मुखिया बन गए। करीब 36 वर्षों के दौरान उनकी अगुवाई में  मिशन की 27 देशों में सौ से अधिक शाखाएं है। इस समय उनके करोड़ों अनुयायी  हैं। वर्ष 1929 में बाबा बूटा सिंह ने संत निरंकारी मिशन की स्थापना की थी। उन्होंने नशा मुक्ति, सामूहिक विवाह, स्वच्छता, रक्तदान को लेकर कई बड़े कार्य किए और कई धार्मिक व सामाजिक किताबें भी लिखी।

 wave of grief over the death of Baba Hardev
रोती बिलखती महिलाएं
अनुयायियों से संयम बरतने की अपील
बाबा हरदेव सिंह के निधन के चलते उनके लाखों अनुयायियों के दिल्ली पहुंचने के अंदेशे के चलते संत निरंकारी मंडल ने दिल्ली स्थित मुख्यालय, घर आदि स्थानों पर नहीं जुटने की अपील की है। मंडल ने सभी अनुयायियों से आग्रह किया गया है कि कोई भी दिल्ली की ओर रवाना न हो और स्थानीय अनुयायी बाबा के घर पर जमा नहीं हो। बाबा से जुड़ी जानकारी जैसे-जैसे मिलेगी उसे सभी तक पहुंचाया जाएगा। उसके अनुसार अनुयायी अपना कार्यक्रम तय करके दिल्ली आएं। इसके बावजूद बाबा के अनुयायी दिल्ली स्थित उनके घर पर पहुंच रहे है।

बुराड़ी लाया जाएगा पार्थिव शरीर
संत निरंकारी मंडल बाबा हरदेव सिंह के पार्थिव शरीर को कनाडा से दिल्ली लाने में जुट गया है। इसके अलावा मंडल ने बाबा के अंतिम दर्शन कराने की व्यवस्था शुरू कर दी है। मंडल के अनुसार बाबा का अंतिम दर्शन बुराड़ी स्थित उसी मैदान में कराया जाएगा, जहां वे प्रतिवर्ष नवंबर माह में आयोजित होने वाले संत समागम में तीन दिन तक अपने अनुयायियों को संदेश देते थे। मंडल सूत्रों के मुताबिक बाबा का अंतिम संस्कार भी निरंकारी कॉलोनी में करने की योजना है। इस संबंध में अंतिम फैसला बाबा के परिजन करेंगे।
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