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जल आपूर्ति विवाद: हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार पर उठाया सवाल

Wed, 24 Jul 2019 09:29 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 24 Jul 2019 09:29 AM IST
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Water supply dispute: Haryana Government raises questions on jurisdiction of High Court
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

दिल्ली के साथ जलापूर्ति को लेकर चल रहे विवाद के मामले में हरियाणा ने हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार पर सवाल खड़ा किया है। हरियाणा सरकार का कहना है कि दोनों राज्यों के बीच चल रहे जल आपूर्ति संबंधी विवाद को सुनने का अधिकार दिल्ली हाईकोर्ट को नहीं है। इस विवाद को केवल अपर रिवर यमुना बोर्ड (यूआरवाईबी) ही सुन सकता है। इसलिए क्षेत्राधिकार के मुद्दे का निपटारा जल्द हो। यह दावा हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर किया है। 

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हरियाणा सरकार ने अधिवक्ता एसबी त्रिपाठी की जनहित याचिका पर हलफनामा पेश कर कहा कि याचिका पर सुनवाई से पहले क्षेत्राधिकार का मुद्दा सुलझाया जाना चाहिए था, लेकिन हाईकोर्ट इसमें नाकाम रहा है। मामला राजधानी दिल्ली को हरियाणा से पर्याप्त जल आपूर्ति के विवाद से जुड़ा है। 
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ के समक्ष हलफनामा दायर कर उस कमेटी की रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताई गई,  जिसे हाईकोर्ट के आदेश पर बनाई गई थी। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा था कि जिन नहर से दिल्ली को पानी की आपूर्ति हो रही है उसमें बांध बनाए गए हैं और इस वजह से जल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। 
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हरियाणा सरकार ने कमेटी की रिपोर्ट को खारिज करने की मांग की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य में यमुना तट में व्यापक स्तर पर खनन हो रहा है। इससे जलापूर्ति तो प्रभावित नहीं हो रही, लेकिन पर्यावरण को खतरा पैदा हो रहा है। हरियाणा सरकार का कहना है कि सरकार से सलाह किए बिना एक ही निरीक्षण के बाद यह रिपोर्ट तैयार कर दी गई। 


हाईकोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड की मांग पर एक रिटायर जज की अगुवाई में कमेटी बनाई थी, जिसने निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट दी थी। बोर्ड का कहना था कि नहर पर बांध होने के कारण जल का प्रवाह व आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसे खारिज करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा कि यमुना जल का प्रवाह बेहतरीन था और दिल्ली को उसके हिस्से से दोगुना पानी मिल रहा था।

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