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Delhi: राजधानी में हर 5वें घर में पीने योग्य नहीं पानी, 20% नमूने फेल; एमसीडी की जांच में बड़ा खुलासा
Tue, 29 Jul 2025 04:01 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 29 Jul 2025 04:01 AM IST
सार
एमसीडी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 की अवधि में 2255 नमूने लिए गए, जिनमें से 409 नमूने निम्न गुणवत्ता के पाए गए। इसी तरह इस वर्ष एक अप्रैल से 30 जून तक 870 नमूनों में से 174 नमूने फेल हुए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
राजधानी में हर घर को साफ और पीने योग्य पानी नहीं मिल रहा है। एमसीडी की जांच में सामने आया है कि जल बोर्ड की ओर से सप्लाई किए जा रहे पानी के नमूनों में से करीब 20 प्रतिशत मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इस तरह हर पांचवें घर में पानी पीने योग्य नहीं है।
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एमसीडी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 की अवधि में 2255 नमूने लिए गए, जिनमें से 409 नमूने निम्न गुणवत्ता के पाए गए। इसी तरह इस वर्ष एक अप्रैल से 30 जून तक 870 नमूनों में से 174 नमूने फेल हुए।
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एमसीडी के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड की ओर से सप्लाई किए जाने वाले पानी के स्रोतों और घरों तक पहुंचने वाली लाइनों से नमूने लेकर जांच की जाती है। यह नमूने मुख्य रूप से जल की क्लोरीन की उपलब्धता, बैक्टीरिया की मौजूदगी और पीने योग्य मानकों के आधार पर जांचे जाते हैं। यदि पानी में क्लोरीन की मात्रा तय मानक से कम पाई जाती है तो दिल्ली जल बोर्ड को तत्काल सूचित किया जाता है ताकि आपूर्ति में सुधार किया जा सके।
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जल (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अंतर्गत पीने का पानी दूषित पाए जाने और उससे जन स्वास्थ्य को खतरा होने की स्थिति में जल बोर्ड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को क्षतिपूर्ति का दावा करने का भी अधिकार होता है। जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना जहां सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, वहीं नमूनों के इतने बड़े स्तर पर फेल होना गंभीर चिंता का विषय है।हालांकि, एमसीडी की रिपोर्ट के अनुसार अभी तक दिल्ली जल बोर्ड के खिलाफ किसी प्रकार की सीधी कार्रवाई नहीं की गई है।
एमसीडी का कहना है कि वह केवल निगरानी और सूचना का कार्य करता है और सुधार की जिम्मेदारी जल बोर्ड की होती है। हालांकि, इस रिपोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि दिल्ली में जल आपूर्ति व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सुधार की जरूरत है। राजधानी में पेयजल की व्यवस्था सरकारों की नाकामी दिखती है।