{"_id":"575322064f1c1b770510963a","slug":"water-health-clinic-in-the-village-engaged-choupal","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘वाटर हेल्थ क्लीनिक’ के तहत गांव में लगी चौपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘वाटर हेल्थ क्लीनिक’ के तहत गांव में लगी चौपाल
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:36 AM IST
विज्ञापन
पानी
- फोटो : getty
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केआईआईटी कॉलेज व नवज्योति इंडिया फाउंडेशन ने मिलकर शनिवार को जल चौपाल का आयोजन किया। यह चौपाल भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोजेक्ट ‘वाटर हेल्थ क्लीनिक’ के तहत नया गांव में आयोजित हुई।
विज्ञापन
गांव के पानी के नमूने लिए गए, जिसे कॉलेज की लैब में टेस्ट किया जाएगा। चौपाल में वॉलंटियर्स को पानी का टेस्ट कैसे करें, इसकी जानकारी दी गई।आने वाले दिनों में सोहना खंड के 44 गांवों में इस प्रकार की चौपाल लगाई जाएगी। इसके माध्यम से जल की गुणवत्ता जांची जाएगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।
विज्ञापन
विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के विशेषज्ञ ने गांव वालों को खराब पानी पीने से होने वाली हानियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पेयजल का स्वच्छ होना जरूरी है। जल चौपाल में सहगल फाउंडेशन के भूमि जल विशेषज्ञ ललित सहगल ने कहा कि भूमिगत जल की खराब गुणवत्ता के लिए यूरिया, खेती मेंइस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और खुले में पड़ा गोबर व कचरा मुख्य कारण हैं।
विज्ञापन
उन्होंने किसानों से कहा कि रसायनों व कीटनाशकों का वह कृषि कार्य में कम से कम इस्तेमाल करें। इस मौके पर केआईआईटी के महानिदेशक ने ग्रामीणों से कहा कि वह कॉलेज की लैब में जल की मुफ्त में जांच करा सकते हैं।