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अब लुटियन दिल्ली में जल संकट: सांसदों के बंगलों में भी होगी पानी की किल्लत, दिल्ली जल बोर्ड ने भारी कटौती

Mon, 17 Jun 2024 07:42 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 17 Jun 2024 07:42 PM IST
सार

एनडीएमसी के अनुसार, जल बोर्ड ने उसको सूचित किया गया है कि कच्चे पानी की अनुपलब्धता के कारण वजीराबाद जल शोधक संयंत्र से पीने योग्य पानी का उत्पादन पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा है।

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Water crisis deepens in Lutyen Delhi due to less water supply from Haryana
पानी की किल्लत से लोग परेशान - फोटो : एएनआई

विस्तार

हरियाणा से पानी कम मिलने से लुटियन दिल्ली में भी जल संकट गहरा गया है। देश के सबसे विशिष्ट इलाके नई दिल्ली के तिलक मार्ग और बंगाली मार्केट स्थित दो भूमिगत जलाशय (यूजीआर) के लिए जल बोर्ड ने 40 फीसदी पानी में कटौती कर दी है। इसके पीछे दलील वजीराबाद जल शोधक संयंत्र के पूरी क्षमता से काम न करने की दी गई है। इससे नई दिल्ली स्थित कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होनी शुरू हो गई है।

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एनडीएमसी के अनुसार, जल बोर्ड ने उसको सूचित किया गया है कि कच्चे पानी की अनुपलब्धता के कारण वजीराबाद जल शोधक संयंत्र से पीने योग्य पानी का उत्पादन पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा है। इस कारण तिलक मार्ग यूजीआर और बंगाली मार्किट यूजीआर के कमांड क्षेत्र में पानी की आपूर्ति दिन में एक बार सुबह के समय में ही उपलब्ध कराई जाएगी।

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एनडीएमसी ने बताया कि जल बोर्ड ने पानी कम मिलने से बंगाली मार्केट, अशोक रोड, हरिचंद माथुर लेन, कॉपरनिकस मार्ग, पुराना किला रोड, बाबर रोड, बाराखंभा, केजी मार्ग, विंडसर प्लेस, फिरोजशाह मार्ग, कैनिंग लेन और आसपास के क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होगी। 

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इन इलाकों में केंद्र सरकार के कई कार्यालय हैं। इसके अलावा मंत्रियों व सांसदों के बंगले भी हैं। एनडीएमसी ने संबंधित इलाके के निवासियों से पानी बचाने और पानी का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करने की अपील की है। उसने तर्क दिया है कि उसके पास सीमित मात्रा में पानी है।

पानी की कमी से संकट में पेड़ पौधे, कई पार्कों में में उड़ने लगी धूल
प्रचंड गर्मी में लोगों को इस्तेमाल के लिए घरों में जरूरत भर पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही। दूसरी तरफ पानी की कमी से पार्कों में पेड़ पौधे सूख रहे हैं। कई पार्कों में इन दिनों धूल उड़ रही है। गीता कॉलोनी में एमसीडी कार्यालय के सामने कृष्णा कुंज पार्क की हालत खराब है। पार्क की देखरेख करने के लिए माली नहीं है। यहां लगे पेड़ पौधे संकट में हैं। यहां पार्क के अंदर ओपन जिम लगा है, लेकिन इसके आस पास चूहों ने बिल बना दिया है। आस पास मिट्टी का ढेर लगा है।

इसी तरह से मंडावली तालाब चौक पर पार्क की हालत खराब है, यहां भी पानी की कमी के कारण पौधे सूख रहे हैं, एमसीडी ने यहां एक बड़े पार्क का निर्माण किया है, जिसको अभी तक आम लोगों के लिए नहीं खोला गया है। यहां भी पर्याप्त संख्या में माली नहीं हैं। ऐसे ही प्रीत विहार पार्क में पानी और माली दोनों की कमी है। इधर पश्चिमी दिल्ली में मंगलापुरी फेज 2 में पार्क के अंदर कूड़ा जमा है। इसकी बाउंड्री टूटी हुई है। पार्क में माली नहीं हैं। पार्क में लगाई गई लाइट खराब है। रात को अंधेरे में यहां पर असामाजिक लोगों का जमावड़ा हो रहा है। खास बात ये है कि इन जगहों के स्थानीय आरडब्ल्यूए ने कहा है कि इन्होंने इसकी शिकायत एमसीडी के अधिकारियों से कई बार की है। लेकिन निगम की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इनकी शिकायत ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।

पौधों को बचाने की चुनौती
एमसीडी के अधिकारियों ने कहा है, इनके 1800 माली और 2300 संविदाकर्मी तैनात किए गए हैं। तेज गर्मी में पेड़ पौधों को बचाने के लिए 16 वाटर टैंकर और 513 स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। यहां गौर करने वाली जरूरी बात ये है कि एमसीडी के पास दिल्ली में 15 हजार से ज्यादा पार्क हैं। सड़कों के किनारे, फ्लाई ओवरों के नीचे, खाली प्लॉटों में पिछले साल 5.3 लाख से ज्यादा पौधरोपण किए गए हैं, उन पौधों की देखरेख करने के लिए पर्याप्त संख्या में माली नहीं हैं। इनमें से ज्यादातर पौधे मौजूदा समय सूख गए हैं।

1000 पार्कों के नवीनीकरण की योजना भी अधूरी
पिछले साल एमसीडी ने एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले अपने करीब 1000 पार्कों के नवीनीकरण की योजना बनाई थी। ये योजना कामयाब नहीं हुई। उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इनके पास किसी नए प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए फंड नहीं है। मेयर और निगम आयुक्त चाहेंगे तभी किसी भी प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो पाएगा।

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