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मच्छरदानी से बनाया डेंगू वार्ड, प्लेटलेट्स चढ़ाने की नहीं है सुविधा

Tue, 15 Sep 2015 07:52 PM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/ अमर उजाला, फरीदाबाद
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/ अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 15 Sep 2015 07:52 PM IST
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Ward dengue mosquito net made, platelet transfusion is not convenient.

जिले के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में डेंगू वार्ड तो है लेकिन इसमें बीमारी के इलाज की सुविधाएं ही मौजूद नहीं हैं। मरीजों को प्लेट्लेट चढ़ाने की सुविधा नहीं होने की वजह से सिर्फ दवाओं के जरिये इलाज किया जाता है।

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यही वजह है कि इस वार्ड में मलेरिया आदि के मरीजों को भर्ती कर खाना कागजी खानापूर्ति की जा रही है।  जिले में इस समय मलेरिया और डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। अभी तक 25 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
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संदिग्ध डेंगू पीड़ितों की संख्या चार सौ के पास पहुंच चुकी है। सरकारी अस्पताल में भी रोजाना औसतन पंद्रह संदिग्ध मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल के लैब से इनकी जांच कराई जाती है। मलेरिया के मरीजों को तो भर्ती कर लिया जाता है।

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सुविधा के नाम पर सिर्फ मच्छरदानी

Ward dengue mosquito net made, platelet transfusion is not convenient.

डेंगू होने पर उसकी खून में प्लेटलेट्स की जांच कराई जाती है। यदि प्लेटलेट्स पचास हजार से कम होती हैं तो इन मरीजों को दिल्ली रेफर कर दिया जाता है।

पचास हजार से अधिक प्लेटलेट्स वाले मरीजों को भर्ती तो किया जाता है लेकिन सिर्फ दवाओं के भरोसे ही उनका इलाज किया जाता है। वजह, अस्पताल में प्लेटलेट्स चढ़ाने की सुविधा नहीं है।

यही वजह है कि डेंगू से पीड़ित मरीज अस्पताल में भर्ती तो हो जाते हैं लेकिन सुविधाओं के नाम पर सिर्फ मच्छरदानी देख कर वापस चले जाते हैं।

मरीजों का दूषित खून चूस रहे मच्छर

Ward dengue mosquito net made, platelet transfusion is not convenient.

प्लेटलेट्स चढ़ाने की हैं दो तकनीक
आरएमओ डॉ. नवीन ने बताया कि सिविल अस्पताल में डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की सुविधा नहीं है। इसके लिए ब्लड सेपरेटर नाम की मशीन आती है जो उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि मरीजों में प्लेटलेट्स दो तरह से चढ़ाई जाती है।

दान किए गए खून से प्लेटलेट्स अलग कर मरीज को चढ़ाई जाती हैं। इसके अलावा सेपरेटर मशीन के जरिये दानकर्ता के शरीर के खून से सीधे प्लेटलेट्स निकाल कर चढ़ाया जा सकता है। यह दोनों ही सुविधाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं।

फटी हैं वार्ड की मच्छरदानियां
डेंगू वार्ड में मरीजों के बचाव के लिए जो मच्छरदानियां लगाई गई हैं वह भी जगह जगह से फटी हैं। इन छेद का फायदा उठाकर मच्छर अंदर पहुंच जाते हैं और मरीजों का दूषित खून चूसते हैं। यह मच्छर अस्पताल के अन्य मरीजों में डेंगू और मलेरिया फैला सकते हैं।

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