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आप-नजीब में फिर छिड़ी 'जंग', जानबूझकर फाइल रोकरने का लगाया आरोप

Fri, 27 May 2016 04:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 27 May 2016 04:18 AM IST
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'war' re erupted in Aap or najib

अनुबंध व अस्थायी कर्मियों के नियमन में रोड़ा अटकाने के लिए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल नजीब जंग को कठघरे में खड़ा किया है। संवाददाता सम्मेलन करके सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा विभाग ने उमा देवी केस को आधार बनाकर शिक्षकों की भर्ती में अतिथि शिक्षकों को उम्र छूट और उनके अनुभव को नंबर के तौर पर वेटेज देने का प्रस्ताव जनवरी में उपराज्यपाल को भेजा था।

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जो सवाल उपराज्यपाल की तरफ से पूछे गए, उसका जवाब भी सरकार ने दिया, लेकिन आज तक प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी गई। सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा के लिए काम करने वाले अतिथि शिक्षकों को आयु छूट और अनुभव के नंबर देने की पॉलिसी बनाई।
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इसमें अधिकतम 2.25 अंक का फायदा भर्ती में इन शिक्षकों को मिलना है। 17 हजार शिक्षक हैं, जिनका भविष्य अधर में है और फिर बच्चों को स्थायी शिक्षक मिल सकेंगे, लेकिन गुणवत्ता शिक्षा के लिए नीति जरूरी है। इस पॉलिसी को जनवरी से उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच फाइल आ और जा रही है। दो बार जवाब भी दे चुके हैं।
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उपमुख्यमंत्री ने कहा, आखिर उपराज्यपाल इसे स्वीकृति क्यों नहीं दे रहे हैं? वो अनुभव को वेटेज देने के फार्मूले से सहमत नहीं हैं। आखिर अनुभव का फायदा मिलना चाहिए। मैं खुद भी बात कर चुका हूं। केंद्र सरकार की भर्ती एजेंसी से बातचीत हो चुकी है। जैसे ही उपराज्यपाल से स्वीकृति मिलेगी, भर्ती शुरू हो जाएगी।

उपराज्यपाल को पत्र लिखकर प्रस्ताव को स्वीकृति की मांग में पत्र लिखा

'war' re erupted in Aap or najib

इसमें करीब तीन महीने लगेंगे। इसी का हवाला देकर उपराज्यपाल को पत्र लिखकर प्रस्ताव को स्वीकृति की मांग में पत्र लिखा है। सिसोदिया ने पत्र में अतिथि शिक्षकों की समर कैंप में भूमिका की सराहना करने के साथ ही उनकी कार्य क्षमताओं पर भी विश्वास जताया है।

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव जल्द अनुमोदित करके सरकार को भेजें ताकि स्कूलों को स्थायी शिक्षक मिलें और अतिथि शिक्षकों की अधर में लटकती स्थिति से मुक्ति मिल सके। इस प्रस्ताव से अतिथि शिक्षकों को नियमित होने का अवसर मिलेगा।

नेता प्रतिपक्ष को भी लिखा पत्र सिसोदिया ने दूसरा पत्र नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता को भी लिखा है। उन्होंने कहा है कि उपराज्यपाल आपकी पार्टी की केंद्र सरकार के निर्देशों पर ही काम करते हैं। इसलिए जल्द से जल्द इस प्रस्ताव को उपराज्यपाल से अनुमोदित करके दिल्ली सरकार को भिजवायें।

इससे छात्रों का भला होगा और अतिथि शिक्षकों की अधर में लटकती स्थिति से मुक्ति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से बस लेन में अवरोध पर जुर्माना और प्रीमियम बस सर्विस को लेकर भी दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच जंग चल रही है।

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