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एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए लंबा हो सकता है इंतजार, लोगों पर मंडरा रहा जानलेवा खतरा

Mon, 10 Jun 2019 06:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 10 Jun 2019 06:28 AM IST
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Wait for anti-rabies vaccine can be long people are at risk 
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

राजधानी में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) की कमी के कारण लोगों पर रेबीज का खतरा मंडरा रहा है। हालात ऐसे हैं कि तीनों एमसीडी क्षेत्रों में रोजाना करीब 300 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं, लेकिन मरीजों को वैक्सीन नहीं मिल पा रही है। 

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बावजूद, वह इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। अधिकारियों का दावा है कि गंभीर मरीजों के लिए सीरम का इंतजाम है, परंतु जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है टेंडर जारी होने के बाद भी कोई आगे नहीं आया। नतीजतन, वैक्सीन के लिए कुछ और दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है। 
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करीब डेढ़ महीने से एमसीडी के अस्पतालों में एआरवी खत्म है। मरीजों को दूसरे अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। सालाना हजारों की संख्या में लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। इसके बाद भी ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हालांकि, दिल्ली के कुछ ही अस्पताल में इस कमी से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर खरीदारी की जा रही है। 
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पूर्वी दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि एक वर्ष में डॉग बाइट के करीब 9000 मामले सामने आ चुके हैं। इसी तरह तीनों निगमों में सालाना हजारों की संख्या में डॉग बाइट के मामले सामने आने के बावजूद एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

वैक्सीन के लिए किसी ने नहीं भरा टेंडर

उत्तरी निगम के जन स्वास्थ्य विभाग के निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके बंसल का कहना है कि रेबीज के इलाज के एआरवी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसके लिए टेंडर निकालने के बाद भी कोई आगे नहीं आ रहा है। कोशिश है कि हालात जल्द से जल्द सुधरे, ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मरीज किए जा रहे हैं दूसरे अस्पतालों में रेफर 

पूर्वी निगम के अस्पताल प्रशासन के निदेशक ने बताया कि डॉग बाइट का शिकार गंभीर मरीजों के इलाज के लिए सीरम की उचित व्यवस्था है। फिलहाल वैक्सीन की कमी है, जिसे जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वैक्सीन के बारे में जानकारी न होने की वजह से रोजाना करीब 20 मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं, जिन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। 

हालात को काबू करने के लिए की जा रही है नसबंदी 

लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की ओर से पिछले छह वर्ष में एक लाख 65 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी की गई। तीनों निगमों में स्टरलाइजेशन का काम लगातार चल रहा है, लेकिन हालात को काबू नहीं किया गया तो हर गली में रेबीज का खतरा बना रहेगा। अन्य निगमों में भी आवारा कुत्तों के स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया जारी है।

दक्षिणी निगम ने की 6 वर्षों में 1.65 लाख आवारा कुत्तों की नसबंदी  

वर्ष              संख्या 
2012-13            13393
2013-14            14347
2014-15            19398
2015-16            27461
2016-17            32189
2018-19            58529

 कुल                  165317
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