अपराधियों को पकड़ने के लिए अनोखी तरकीब
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बदायूं रेप कांड से हिली सरकार प्रदेश की पुलिसिंग पुख्ता करने के सारे पैंतरे इस्तेमाल कर रही है।
सूबे में पहली बार अपराधी की आवाज को भी सुबूत बनाने की तैयारी है, ताकि सुबूतों के अभाव या कमजोर पैरवी की वजह से अपराधी छूटने न पाएं।
अब सर्विलांस के माध्यम से गिरफ्तारी से पहले फोन पर रिकार्ड की गई आवाज और गिरफ्तारी के बाद रिकार्ड की गई आवाज के नमूने लिए जाएंगे।
सबूत के तौर पर कोर्ट में पेशी
गांधीनगर और चंडीगढ़ लेबोरेट्री में आवाज के नमूनों का मिलान होगा, जिसकी रिपोर्ट पुलिस अहम सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश करेगी।
डीजीपी एएल बनर्जी ने प्रदेश के सभी पुलिस प्रमुखों को इस संबंध में 14 बिंदुओं की गाइडलाइन भेजी है। डीजीपी ने लिखा है कि अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण अभियोगों में भी पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में अपराधियों के खिलाफ पैरवी नहीं हो पा रही है।
लिहाजा ऐसे मामलों में जिनमें इंटरसेप्शन वायस ली गई है, उनमें इसे विवेचना में अवश्य शामिल किया जाए। क्योंकि ऐसा करने से विवेचना का वैज्ञानिक पक्ष मजबूत होता है और अन्य साक्ष्यों पर निर्भरता भी कम हो जाती है।
ऐसे सबूत बनेगी आवाज
रिकार्डेड वायस की सीडी तैयार की जाए, जिसे मिलान के लिए गांधीनगर में गुजरात फोरेंसिक साइंसेस यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ में सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री भेजा जाए।
जांच रिपोर्ट से न्यायालय को केस डायरी के माध्यम से अवगत कराया जाए। अधिकांश मामले पुलिस इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के माध्यम से सुलझाती है। अपराधी कई बार फोन पर बातचीत करते हुए कबूल कर लेता है कि उसने अपराध किया है।
इसके बाद पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है। लेकिन अब पुलिस गिरफ्तारी से पहले उसके जुर्म कबूलने की आवाज और गिरफ्तारी के बाद उसके बयान की आवाज का मिलान करेगी।
मोबाइल नंबर प्रोर्टेबिलिटी
डीजी ने लिखा है कि कई महत्वपूर्ण अभियोगों की विवेचना के दौरान किसी नंबर की सीडीआर शून्य आने पर उस नंबर को निष्क्रिय मान लिया जाता है।
जबकि बाद में पता चलता है कि वह नंबर किसी अन्य नेटवर्क पर पोर्ट आउट हो चुका था। लिहाजा अब पुलिस सीडीआर के साथ ये भी पता करेगी कि नंबर पोर्ट आउट हुआ है या नहीं।