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Vivek Vihar Fire: मौत भी न तोड़ सकी ममता का बंधन, मां की छाती से लिपटा मिला मासूम आनु
Mon, 04 May 2026 02:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 04 May 2026 02:07 AM IST
सार
कमरे के फर्श पर एक ही परिवार के पांच लोगों के शव जली अवस्था में पड़े थे, जिन्हें पहचानना भी मुश्किल था। इनमें से एक डेढ़ साल का मासूम अपनी मां की छाती से लिपटा मिला।
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दिल्ली के विवेक विहार में लगी चार मंजिला इमारत में लगी आग।
- फोटो : जी पॉल
विस्तार
विवेक विहार की उस जली हुई इमारत के तीसरे फ्लोर पर धुआं छटने के बाद जब रेस्क्यू टीम पहुंची तो वहां का मंजर सन्न कर देने वाला था। कमरे के फर्श पर एक ही परिवार के पांच लोगों के शव जली अवस्था में पड़े थे, जिन्हें पहचानना भी मुश्किल था। इनमें से एक डेढ़ साल का मासूम अपनी मां की छाती से लिपटा मिला।
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इस तस्वीर ने रेस्क्यू टीम को भी भावुक कर दिया। इस अग्निकांड ने मां आंचल, उसके डेढ़ साल के बेटे अनु, पति निशांक, सास अनिता और ससुर अरविंद जैन की मौत हो गई है। परिजनों ने मां-बेटे के शव का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया, जिसे देखकर श्मशान घाट पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
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एक परिजन ने बताया कि शादी के बाद काफी समय तक निशांक और आंचल के यहां कोई बच्चा नहीं हुआ था। काफी मन्नतों के बाद शादी के छह साल बाद दोनों के यहां आकाश उर्फ आनु का जन्म हुआ था। परिवार में सबसे छोटा होने की वजह से वह सबका लाडला था। आंचल भी उसे अपने कलेजे से लगाकर रखती थी। अंतिम समय भी उसने उसे नहीं छोड़ा।
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पापा प्लीज बचा लो, हमारे घर में आग लग गई है...
पापा प्लीज बचा लो, हमारे घर में आग लग गई है...। आग की लपटों में घिरी आंचल ने विवेक विहार में ही रहने वाले अपने पिता अनिल जैन को कॉल कर मदद की गुहार लगाई थी। उसने पिता से कहा था कि शायद अब बच पाना मुश्किल है। परिवार जब तक आंचल के घर के पास पहुंचा तब तक आग ने इमारत को अपनी चपेट में ले लिया था।
वहीं निशांक जैन ने अपने एक दोस्त को कॉल कर कहा था कि उनके फ्लैट का सेंट्रल लॉक जाम हो गया है। दरवाजा कैसे खुलेगा। निशांक के भाई दीपक ने बिलखते हुए बताया कि आखिरी समय में उसके भाई ने कॉल कर मदद मांगी थी लेकिन मैं अभागा अपने भाई को बचा नहीं सका।
पुलिस और दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया तो पांचों लोगों के शव उनके फ्लैट में बुरी तरह जले हुए मिले। बाद में परिजनों की मौजूदगी में शवों को मोर्चरी भेजा गया। एक परिवार ने बताया कि बागपत के टीकरी का रहने वाला परिवार पहले सीलमपुर में रहता था।
करीब 9 साल पहले परिवार यहां रहने के लिए आया था। निशांक के पिता काफी धार्मिक और मिलनसार थे। हर किसी के सुखदुख में शामिल रहते थे। निशांक की मां भी रिश्तेदारों का खूब ख्याल रखती थीं। उनके परिवार के पांच लोगों की मौत से पूरा परिवार और रिश्तेदार सदमे में हैं।