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एंड्रॉयड जैसे वायरस के निशाने पर है सरकारी सर्वर, काम प्रभावित होने के बाद भी नहीं की गई शिकायत

Sat, 22 Oct 2016 11:51 AM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 22 Oct 2016 11:51 AM IST
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virus named android and many more are effecting government server says rti
- फोटो : social media

देश में एंड्रॉयड से मिलते जुलते नाम वाले सक्रिय वायरस साइबर सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। सरकारी संस्था इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट इन) ने इस साल करीब डेढ़ दर्जन ऐसे वायरस की पहचान की है जो बैंकिंग से लेकर सरकारी विभागों के सर्वर को निशाना बना रहे हैं।

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अमर उजाला को आरटीआई के जरिये मिली जानकारी के अनुसार इन वायरसों की संख्या साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। इनमें एंड्रॉयड के मिलते-जुलते नाम वाले कई वायरस सक्रिय हैं। हैरत की बात यह है कि हर साल नए-नए तरह के वायरस की पहचान होती है। सर्ट इन ने पिछले तीन सालों में 21 वायरसों की पहचान की है।
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इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से सितंबर 2016 को भारतीय साइबर स्पेस में वायरसों की घुसपैठ व उनसे होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी आरटीआई से मांगी गई थी। 18 अक्टूबर को मिले जवाब में विभाग ने कहा कि काफी समय से वायरस पैदा हो रहे हैं।

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वायरस से कामकाज बुरी तरह प्रभाव‌ित पर क‌िसी ने नहीं की र‌िपोर्ट

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वायरस या मालवेयर कम्प्यूटरों तथा स्मार्टफोन में दिक्कत पैदा करता है। हालांकि आरटीआई के जरिए विभाग से हैरत में डालने वाला जवाब भी दिया। विभाग ने लिखा है कि अभी तक सर्ट-इन को किसी ने ऐसी किसी घटना के बारे में रिपोर्ट नहीं की है, जबकि सरकार के कामकाज को वायरस और मालवेयर ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। विभागों ने वायरसों से रोकथाम और समाधान पर होने वाले खर्च का ब्यौरा देने से असमर्थता जताई।

स्मार्टफोन को बना रहे निशाना
साइबर विशेषज्ञों का कहना है आरटीआई के जरिए जिन वायरसों के नाम आए उनमें अधिकांश वायरस स्मार्टफोन के जरिए सिस्टम को हैक कर लेते हैं। वहीं कई वायरस मेल के जरिए आपके ई-मेल में घुसपैठ करते हैं, उसमें मौजूद डाटा तक को चुरा लेते हैं। बैंकिंग सर्वर को हैक करने में इन वायरसों के हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

इन वायरसों ने खड़ी की मुसीबत
आरटीआई के मुताबिक वर्ष 2016 में एंड्रॉयड वाडक्सेंट्स, एंड्रॉयड हमींगबैड, कोरबॉट, डॉर्कबोट, कैफाव, लॉकी रैनसमवेयर, फ्लीरसाइवेट, निवडॉर्ट, एक्सकोडघोस्ट, रैसकैम नाम के वायरसों की पहचान हुई है। जबकि 2015 में क्राइडेक्स,  बायोजिह रैट, किलिम, गालेरोटेड नाम के वायरसों का पता लगा था। साल 2014 में एंड्रॉयड ओपीफेक, एंड्रॉयड फैकइन्स्ट, ब्लादाबिंदी, जेकस, बैक ऑफ पीओएस मालवेयर, डाइरेजा, रेजिन, जैसे वायरसों ने 2014 में मुसीबत खड़ी की थी।

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