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भारत बंद हिंसा : एम्स के डॉक्टरों से भरी बस पर हमला
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 03 Apr 2018 10:01 AM IST
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Bharat Band over SC ST Act
- फोटो : PTI
विभिन्न इलाकों में सोमवार को हुई हिंसा के चलते देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के डॉक्टर बाल-बाल बचे। गाजियाबाद स्थित नशा मुक्ति केंद्र से वापस लौट रहे डॉक्टरों से भरी बस पर आंदोलनकारियों ने पथराव किया, जिसकी वजह से बस की कई खिड़कियां और उन पर लगा शीशा टूटने से डॉक्टरों में भगदड़ मच गई।
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आनन-फानन में बस से नीचे उतरकर डॉक्टरों ने इस बात की सूचना एम्स प्रबंधन को दी। जिसके बाद स्थानीय पुलिस को तत्काल डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सूचना दी गई।
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डॉक्टरों ने बताया कि भीड़ इस कदर बेकाबू थी कि उनको बार-बार बोलने पर भी सुनने को तैयार नहीं थे, जबकि बस पर एम्स और डॉक्टर ड्यूटी दोनों लिखा हुआ था। हालांकि राहत की खबर यह रही कि समय रहते सभी डॉक्टरों ने खुद की सुरक्षा करते हुए हिंसा से खुद को बचाया।
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बता दें कि गाजियाबाद स्थित नशा मुक्ति केंद्र में रुटीन जांच को लेकर एम्स की ओर से डॉक्टरों का दल सप्ताह में एक दो बार जाता रहता है। चूंकि पिछले चार दिन से सरकारी अवकाश होने के कारण सोमवार को डॉक्टरों का जाना तय था। सोमवार सुबह बस में करीब 25 डॉक्टर मौजूद थे। नशा मुक्ति केंद्र पर तमाम रोगियों की जांच के बाद बस गाजियाबाद से दिल्ली की ओर रवाना हुई।
इस बीच यूपी बॉर्डर पर चंद आंदोलनकारियों ने बस को चारों ओर से घेर लिया और पथराव शुरू कर दिया। बस में मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि रेलवे ट्रैक पर बिछने वाले पत्थरों से आंदोलनकारी हमला कर रहे थे। उनकी बस के ज्यादातर कांच टूट गए थे। सभी डॉक्टरों ने अपनी जान बचाने के लिए सीट के नीचे घुसना ही ठीक समझा।
एक डॉक्टर ने बताया कि आंदोलनकारियों की संख्या कम होने की वजह से बड़ा हादसा टल गया। हिंसा करने वालों में ज्यादातर 17 से 22 वर्ष तक की आयु के लड़के थे।