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सबका दिल चुरा ले गईं वो शाही दुलारियां

Sun, 02 Feb 2014 06:21 PM IST
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 02 Feb 2014 06:21 PM IST
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vintage cars spread their charm amongst shaukeens

साइबर सिटी में दो दिनों तक विंटेज कारों का शाही दरबार सजा रहा। देश-विदेश की इन दुर्लभ कारों को देखने के लिए गुड़गांव ही नहीं देश भर से मुरीद पहुंचे।

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विंटेज कारों के मालिकों ने अपने-अपने वाहनों की दिल खोलकर तारीफ की। इन सभी ने कहा कि ‘यह मत पूछो कि कितना खर्च होता है, इन्हें संभालने में’। बस शौक बड़ी चीज है! पैसा नहीं जनाब। हम तो शौक के माध्यम से एक सभ्यता का सृजन कर रहे हैं।
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लेजर वैली में वर्ष 1915 से लेकर 1964 तक की करीब सौ विंटेज कारें थीं। इनके दीदार का क्रेज लोगों में ऐसा था कि 100-100 रुपये का टिकट लेकर लोगों ने दो दिनों तक खूब देखा।
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विश्व की इकलौती बची नितिन डोसा की 1933 मॉडल हडसन कार ने तो रविवार को भी धूम मचा दिया। इस कार को देखने वालों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई।

सूरजकुंड मेले में घूमने आए विदेशियों ने भी विंटेज कारों को निहारने के लिए गुड़गांव का रुख किया। दिल्ली से आए कैप्टन अशोक खोसला ने कहा कि उनकी कार मोर्गन वर्ष 1958 मॉडल की है। वर्ष 2007 से उनके पास है।

यह उनके लिए परिवार के सदस्य जैसी है। इन्हें संभालने में काफी खर्च होता है, पर शौक के आगे यह खर्च कुछ भी नहीं है। जब भी अपनी इस छोटी, ग्लैमरस कार को लेकर रोड पर निकलते हैं तो किसी महाराजा जैसी फीलिंग आती है।

खोसला बताते हैं कि अपनी कार के साथ जब कभी रोड पर निकलते हैं तो ट्रैफिक जाम लग जाता है। क्योंकि लोग कार को देखने लगते हैं।

दो वर्ष पहले प्रगति मैदान रोड पर उनकी कार को देखने के चक्कर में एक एक्सिडेंट हो गया था। 1935 की रॉल्स रोयस और 1929 की डोज ब्रदर रखने वाले मदन मोहन कहना है कि इन कारों पर काफी खर्च होता है।


पेट्रोल से चलती हैं सभी विंटेज कारें
पुरानी कारों को मॉडिफाई करवाने के दौरान इनका ओरिजनल लुक बनाए रखना होता है। विंटेज की सभी कारें पेट्रोल से चलती हैं। यह सभी कारें एक लीटर पेट्रोल में डेढ़ से चार किलोमीटर का एवरेज देती हैं। यही कारण है कि विंटेज कारों के शौकीन इसे हफ्ते में एक या दो ही दिन दौड़ाते हैं।

किराए पर देना तौहीन
विंटेज कारों के अधिकतर मालिकों का कहना है कि विंटेज कारों को रखना उनका पैशन है। भाड़े पर देने के लिए नहीं। कुछ लोग ही ऐसा करते हैं। कैप्टन अशोक खोसला कहते हैं कि अपने घर की शादी पर भी इन कारों को नहीं ले जाते। किराए पर देना तो दूर की बात।

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