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इकलाख के परिजनों ने समेटना शुरू किया सामान

Tue, 06 Oct 2015 02:25 PM IST
Updated Tue, 06 Oct 2015 02:25 PM IST
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victim's family started to crimp goods from the village

बिसाहड़ा में इकलाख के पीड़ित परिवार ने घर का सामान समेटना शुरू कर दिया है। सोमवार को पुलिस की सुरक्षा में उसकी दुकान का सारा सामान और घर का कुछ सामान कैंटर में भरकर मुरादनगर उसके साले के घर रवाना हुआ।

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उधर, लखनऊ से वापस लौटा पीड़ित परिवार दिल्ली आने के बाद अपने रिश्तेदारों के घर रुका है। इकलाख के परिजनों ने मुख्यमंत्री के समक्ष गांव में रहने से इनकार कर दिया था। वायुसेना की ओर से भी कहा गया है कि अगर वो चाहें तो वायुसेना परिसर में रह सकते है।
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परिवार की इच्छा और उनकी सुरक्षा के लिहाज से ग्रेटर नोएडा या गजियाबाद में रहने की व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री भी सरकारी आवास देने की सहमति जता चुके हैं।
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फिलहाल परिवार इकलाख के बड़े साले के यहां है

victim's family started to crimp goods from the village

बिसाहड़ा गांव में मनोज शिशोदिया के घर के सामने ही इकलाख बिजली-पंप आदि का छोटा मोटा कार्य करता था। उसकी मौत के बाद सोमवार शाम को पुलिस सुरक्षा में उसकी दुकान का सामान खाली कराया गया।


वहीं, घर का भी कुछ सामान एक कैंटर में भरकर मुरादनगर चामुंडा चौकी के पास स्थित ईदगाह के पास रहने वाले साले शाबिर के घर पर भेज दिया गया है।

अब अगले चरण में घर का पूरा सामान शासन-प्रशासन द्वारा आवंटित घर पर ले जाया जाएगा। शाबिर ने बताया कि बाकी घर वालों को भी लेने उनके बड़े भाई और इकलाख के बड़े साले इकरामुद्दीन दिल्ली गए हैं। मालूम हो कि इकलाख की पत्नी इकरामन मुरादनगर में रहने वाले शाबिर और इकरामुद्दीन की बहन हैं।

पहले जान की सलामती जरूरी है

victim's family started to crimp goods from the village

इकलाख की मौत के बाद उसकी बीवी इकरामन (शाबिर की बहन) घर पर हैं, लेकिन हम प्रयास कर रहे हैं कि इद्दत का समय चार महीने दस दिन गुजारने के लिए उसको यहां गांव में न रहना पड़े।

इकलाख का साला साबिक कहता है कि पहले जान की सलामती जरूरी है। एक-दो दिन में सारा परिवार मुरादनगर आ जाएगा। वायुसेना प्रमुख अरूप राहा के मुताबिक‘हम हर तरह की मदद दे रहे हैं।

हम पीड़ित परिवार के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में हैं। हर किसी को उनकी चिंता है और उनकी हर संभव मदद की कोशिश की जा रही है। जो कुछ भी जरूरी है, किया जा रहा है।’

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