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शिंगापुर और शंघाई को मात देने वाले इस शहर में कहीं मुश्किल न हो जाए रहना

Sun, 26 Jun 2016 01:49 AM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 26 Jun 2016 01:49 AM IST
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Vertical Foresteshn relief from the heat will, will be seen between buildings greener
गुड़गांव - फोटो : अमर उजाला
शहर में जिधर भी नजर दौड़ाकर देखिए, सिंगापुर और शंघाई को मात देती हुई  एक से बढ़कर एक बिल्डिंगें खड़ी हैं, लेकिन इन सबके बीच पेड़-पौधे बहुत कम हो गए हैं। ऐसे में यहां प्रदूषण और गर्मी बढ़ रही है।
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फॉरेस्ट कवर एरिया अपने मानक 33 फीसदी की जगह मुश्किल से 2 फीसदी ही बचा है। आने वाले दिनों में यह स्थिति लोगों को और परेशान करेगी। जानकार कहते हैं कि इटली और स्विटजरलैंड जैसे देशों की तर्ज पर अब गुड़गांव जैसे बहुमंजिले और शीशे की बिल्डिंगों वाले शहरों में खड़ी वनीकरण (वर्टिकल फॉरेस्टेशन) करना होगा, वरना एक दिन ऐसा आएगा कि गर्मी और प्रदूषण के कारण यहां रहना मुश्किल हो जाएगा। 
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कई देशों में वर्टिकल फॉरेस्टेशन हो रहा है, जिसमें बिल्डिंग के हर फ्लोर पर पेड़ लगाना होता है, ताकि ऑक्सीजन की कमी न हो, वातावरण गर्म न हो और प्रदूषण में कमी आए।  विशेषज्ञों के मुताबिक शहरीकरण के इस दौर में वनों के संरक्षण और जैव विविधता को बचाए रखने का यह एक विकल्प है। पूरे दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा बहुमंजिली और शीशे वाली आलीशान इमारतें गुड़गांव में हैं। 
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बहुमंजिला इमारतों में वर्टिकल फॉरेस्टेशन को देना होगा बढ़ावा

Vertical Foresteshn relief from the heat will, will be seen between buildings greener
गुड़गांव

बेहिसाब बढ़ती आबादी और उनके लिए बनते घरों ने पेड़-पौधों को निगल लिया है। इस समय साइबर सिटी में करीब 1100 ऐसी बिल्डिंगें हैं। नगर निगम के पूर्व मुख्य नगर योजनाकार एससी कुश का कहना है कि अभी वर्टिकल फॉरेस्टेशन जैसा कोई शब्द अपने यहां अर्बन प्लानिंग में नहीं है। ग्रीन बिल्डिंग की संकल्पना है, लेकिन यह अब तक सफल नहीं हो पाई है। बिल्डर इस तरह की शुरुआत करें तो लोगों की सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए अच्छा होगा। 

चौंकाने वाले तथ्य
-गुड़गांव का कुल ट्री कवर एरिया 3.5 जबकि फारेस्ट कवर एरिया सिर्फ 2 फीसदी बचा है। बेहिसाब कंस्ट्रक्शन का यही हाल रहा तो इसे 1 फीसदी होने में देर नहीं लगेगी। 
-देश का दूसरा सबसे कम वन क्षेत्र वाला राज्य हरियाणा है। सिर्फ 3.59 फीसदी क्षेत्र वन है, जबकि ईको सिस्टम के हिसाब से 33 फीसदी भूक्षेत्र वन होना चाहिए। यहां जो 3.59 फीसदी वन क्षेत्र है।

इसमें भी बड़ा योगदान अरावली का है।15 मीटर से ऊंची बिल्डिंग बहुमंजिला इमारत की श्रेणी में आती हैं। किसी भी बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट में 15 से 20 फीसदी क्षेत्र ग्रीन कवर होना चाहिए, लेकिन बिल्डर इस जगह का इस्तेमाल पार्किंग के लिए करवाते हैं। 

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