चिंताजनक खुलासा: प्रदूषण फैलाने के साथ ऑक्सीजन भी खत्म कर रहे हैं वाहन
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ये बहुत ही रोंगेट खड़े कर देने वाला खुलासा है। वाहन न केवल प्रदूषण फैला रहे हैं कि बल्कि ऑक्सीजन को भी तेजी से खत्म कर रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो नए भारत में जल सकंट की तरह ऑक्सीजन की कमी भी गहरा सकती है।
ये भी सुनकर थोड़ा अजीब लगे लेकिन ये सच है कि एक इंसान को रोजाना 3 हजार लीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार नए भारत की कल्पना कर रही है। इसके पीछे विशेषज्ञों के तर्क भी कई हैं।
रोजाना एक इंसान 500 लीटर विश्राम के दौरान, 1 हजार लीटर रोजमर्रा के कार्य और 1500 लीटर ऑक्सीजन श्रमपूर्वक व्यायाम करते वक्त लेता है। जबकि प्रति लिटर 10 किलोमीटर का माइलेज रखने वाली कार का इंजन एक लीटर पेट्रोल की खपत में इंजन 1700 लीटर ऑक्सीजन लेता है।
पुणे स्थित चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के डॉ. संदीप साल्वी ने रविवार को का कहा कि जहां देश में शहरीकरण पर जोर दिया जा रहा है। वहीं इसे लेकर प्रदूषण जैसे दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने अमर उजाला से विस्तृत चर्चा में फाउंडेशन एवं अंतर्राष्ट्रीय शोधों का हवाला देते हुए फेफड़ा रोगियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई।
बाजार में अब हिमाचल और उत्तराखंड की शुद्घ हवा तक बिकने लगी है। 4015 में प्रकाशित लॉसेंट हेल्थ ग्लोबल के अनुसार भारत में जिन रोगों के लिए मरीज डॉक्टर के पास जाते हैं, उनमें सबसे ज्यादा फेफड़ों से जुड़ी परेशानियां हैं। देश के 880 शहरों में 2 माह से लेकर 107 वर्ष तक की आयु को लिया गया। भारत में पांच सबसे ज्यादा जांचें की जाती हैं, जिनमें उच्च रक्तचाप, काला दमा(सीओपीडी), एनीमिया, मधुमेह और श्वसन संक्रमण शामिल हैं।
90 फीसदी ऊर्जा सिर्फ ऑक्सीजन से
सामान्यत : एक कार को एक किलोमीटर चलाने के लिए 1700 लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने कहा कि इंसान को जीवित रहने के लिए भोजन, पानी और शुद्घ हवा यानि ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि भोजन-पानी के बगैर कुछ घंटे जीवित रहा जा सकता है। लेकिन ऑक्सीजन के बगैर नहीं। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन से इंसान के शरीर को 90 फीसदी पौष्टिक ऊर्जा मिलती है। पाठकों की जागरुकता के लिए उन्होंने ये भी बताया कि दुनिया भर में 30 फीसदी ऑक्सीजन जंगलों और 70 फीसदी महासागर, समुद्र और झील से मिलती है। हरी शैवाल सालाना 330 बिलियन टन ऑक्सीजन छोड़ती है।
एक-एक सांस गिनने की पड़ सकती है नौबत
ऑक्सीजन के इस हिसाब-किताब पर डॉ. साल्वी ने बताया कि दुनिया के 20 शीर्ष प्रदूषित शहरों में भारत के 15 शामिल हैं। काला दमा (सीओपीडी) से 8.48 लाख, दमा से 1.83 लाख, प्रदूषण से 6.82 लाख लोगों की सालाना मौत हो रही है। एड्स, टीबी, मलेरिया से होने वाली मौत से तीन गुना ज्यादा वायु प्रदूषण से जान जा रही हैं। प्रदूषण के मामले में भारत पाकिस्तान, चीन, रूस, अमेरिका सहित दुनिया में सबसे आगे है। ऐसी स्थिति में अगर अब ऑक्सीजन का हिसाब नहीं रखा गया, तो आने वाले दिनों में संकट गहरा सकता है।
100 सिगरेट के बराबर एक मच्छर कॉयल देता प्रदूषण
साल 2016 में किए एक अध्ययन का हवाला देते हुए डॉ. साल्वी ने बताया कि दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुडग़ांव जैसे शहरों में कई इलाके हैं, जहां लोगों के घरों में क्रॉस वेंटीलेशन तक नहीं है। चूंकि यहां मच्छरों का आतंक है, लोग बचने के लिए कॉयल जलाते हैं। मगर उन्हें शायद नहीं पता कि एक मच्छर कॉयल जलने के बाद 100 सिगरेट के बराबर प्रदूषण करती है। उनके अध्ययन में ये सिद्घ भी हो चुका है। इसलिए उन्होंने सलाह दी है कि सोने वाले कमरे से कॉयल दूर रखें और खिड़की को खोल दें।
घर में जरा इनसे भी बचके
मच्छर कॉयल की तरह घर में मौजूद रुम फ्रेशनर, इत्र, हेयर स्प्रे, गोंद, रंग का स्प्रे, धूपबत्ती, अगरबत्ती, फर्श साफ करने वाले पदार्थ, डिओडोरेंट्स इत्यादि फेफड़ों के लिहाज से ठीक नहीं। ये सभी घर के अंदर के प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं।