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जानिए, क्यों राजधानी में दोहराए जा रहे गैंगरेप

Sun, 11 Jan 2015 11:54 AM IST
Updated Sun, 11 Jan 2015 11:54 AM IST
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Vasant kumnj rape case and role of delhi police

वसंत विहार गैंग रेप जैसा एक जघन्य मामला रविवार को सामने आया है। इस वारदात ने जहां एक ओर राजधानी में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध की ओर इशारा किया। वहीं, दूसरी ओर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी।

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वर्तमान समय में दिल्ली पुलिस के 14 हजार पद खाली पड़े हैं। हाईकोर्ट कई बार दिल्ली पुलिस व सरकार को पुलिस बल और एफएसएल लैब की कमी के मुद्दे पर कड़ी फटकार लगा चुकी है।
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जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी ने वसंत विहार गैंग रेप के बाद सरकार को दस मुख्य सिफारिशी की थीं। इन पर अमल करते हुए दुष्कर्म संबंधी कानून को सरकार ने संशोधित कर दिया।
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लेकिन पुलिस सुधार की सिफारिश आज भी फाइलों में दबी हैं और पुलिस आज भी संख्या बल की कमी से जूझ रही है। पुलिस को हर जिले में एफएसएल लैब बनाने हैं जो अब तक बनकर तैयार नहीं हुए हैं।

'आईपीएस आधिकारी नहीं लेते दिलचस्पी'

Vasant kumnj rape case and role of delhi police

वसंत विहार गैंग रेप के समय मौजूद 630 पीसीआर बेड़े में 370 पीसीआर शामिल कर इसके एक हजार किया गया था। मौजूदा समय में करीब 600 पीसीआर राजधानी की सड़कों पर गश्त करती हैं क्योंकि सारी पीसीआर को चलाने के लिए पुलिस के पास कर्मी नहीं हैं।

राजधानी की डेढ़ करोड़ से ज्यादा आबादी की सुरक्षा की जिम्मेदार दिल्ली पुलिस की पीसीआर में केवल साढ़े आठ हजार लोग हैं। पुलिस की करीब पांच फीसदी पीसीआर में ही महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं।

पुलिस की कमी पर सरकार को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट जस्टिस बीडी अहमद ने 19 नवंबर 2014 को कहा था कि आईपीएस अधिकारियों की राजधानी की हालत सुधारने में दिलचस्पी नहीं है।

इसलिए दिल्ली पुलिस में अतिरिक्त बल की भर्ती को पुलिस व सरकार ने बैडमिंटन की शटल बना दिया है। दिल्ली पुलिस में करीब 14 हजार पद खाली पड़े हैं।

नेताओं और वीआईपी सुरक्षा में लगी पुलिस

Vasant kumnj rape case and role of delhi police

जस्टिस बीडी अहमद व जस्टिस सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ ने कहा था कि राजधानी में पुलिस है ही नहीं जो पुलिस वह नेताओं व वीआईपी की सुरक्षा में लगी है।

आम लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस नहीं है। पुलिस में अतिरिक्त बल की भर्ती का मुद्दा काफी समय लंबित है लेकिन पुलिस और सरकार इस दिशा में कुछ नहीं कर रहे।

खंडपीठ ने कहा कि पुलिस की कमी के कारण राजधानी में अपराध की जांच पर असर पड़ रहा है। जांच असरदार तरीके से नहीं हो रही है इस कारण ज्यादातर मामलों में आरोपी बरी हो रहे हैं।

बेकसूर लोगों को जेल में रखा जा रहा है और आरोपी खुले घूम रहे हैं। दरअसल पुलिस जनता, कोर्ट और नेताओं को मूर्ख बना रही है।

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