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Air Pollution UP : प्रदूषण से हांफ रहा है उत्तर प्रदेश, पश्चिम में हालात ज्यादा खराब, झांसी-बरेली में हवा साफ

Fri, 18 Oct 2024 05:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 18 Oct 2024 05:18 AM IST
सार

नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और गोरखपुर एम्स के संयुक्त अध्ययन झांसी और बरेली में हवा साफ है, जबकि गोरखपुर में प्रदूषण का स्तर सर्वाधिक 200 पार है। पश्चिमी यूपी के शहरों में प्रदूषण की स्थिति ज्यादा खराब है। इनमें गाजियाबाद, नोएडा, गजरौला, खुर्जा और मुरादाबाद जैसे शहर शामिल हैं।

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Uttar Pradesh is gasping due to air pollution
Air Pollution

विस्तार

जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़े राज्य यूपी के अधिकांश शहर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। हालांकि, इनमें से कई शहरों में बीते पांच साल में बेहतर प्रयासों के चलते प्रदूषण की स्थिति में काफी सुधार भी आया है।

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नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और गोरखपुर एम्स के संयुक्त अध्ययन झांसी और बरेली में हवा साफ है, जबकि गोरखपुर में प्रदूषण का स्तर सर्वाधिक 200 पार है। पश्चिमी यूपी के शहरों में प्रदूषण की स्थिति ज्यादा खराब है। इनमें गाजियाबाद, नोएडा, गजरौला, खुर्जा और मुरादाबाद जैसे शहर शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने साल 2017 से 2023 के बीच उप्र के 15 शहरों में वायु गुणवत्ता के स्तर की समीक्षा की है। इस अध्ययन में अमेरिका के ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इनक्यूबेटर (जीएचएआई) के शोधकर्ताओं ने भी सहयोग दिया है।
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द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा है कि भारत का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश गंभीर प्रदूषण स्तर का सामना कर रहा है, जिसके लिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत देश में प्रदूषण से जूझ रहे राज्यों के लिए साल 2026 तक इसमें 40 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य रखा है। यूपी में इसकी स्थिति जानने के लिए 15 शहरों पर यह अध्ययन किया गया था।
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वर्ष 2023 में झांसी में 72.73 रहा एक्यूआई का स्तर
अध्ययन के अनुसार, साल 2023 में झांसी में सबसे कम वायु गुणवत्ता सूचकांक(एक्यूआई) का स्तर (72.73) रहा जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के लिहाज से मध्यम श्रेणी में है। गोरखपुर में एक्यूआई का स्तर लगातार खराब दिखा। यहां 2019 में एक्यूआई 249.31 तक पहुंचा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, नोएडा और मुरादाबाद जैसे शहरों में भी प्रदूषण का काफी बोझ मिला है।

पीएम 10 के स्तर में आया सुधार
पूर्वानुमानों के अनुसार पांच साल में बरेली की हवा में प्रदूषणकारी तत्व पीएम 10 के स्तर में 70% से अधिक की कमी आई है, जबकि रायबरेली में 58%, मुरादाबाद में 55%, गाजियाबाद में 48%, आगरा में 41% और वाराणसी में 40% की कमी आई। गोरखपुर और प्रयागराज ने पीएम 10 के स्तर में क्रमश 50% और 32% की वृद्धि की भविष्यवाणी की। शोधकर्ताओं का मानना है कि सरकार और प्रशासन मिलकर भविष्य में इन शहरों में एनसीएपी के लक्ष्यों को पूरा कर सकता है।

प्रदूषण की सूची में ये शहर शामिल
शोधकर्ताओं ने प्रदेश के 15 शहरों को अध्ययन के लिए चुना जिनमें आगरा, प्रयागराज, बरेली, फिरोजाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, खुर्जा, लखनऊ, मुरादाबाद, नोएडा, रायबरेली और वाराणसी शामिल हैं।

बरेली, रायबरेली ने ऐसे बदली तस्वीर
जिन शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधरी है उन्होंने क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें अतिरिक्त सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (सीएएक्यूएमएस) की स्थापना और स्वच्छ वायु ऐप शामिल है। इन शहरों ने कठोर सड़क धूल प्रबंधन रणनीतियों, कठोर वाहन उत्सर्जन जांच और मजबूत औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण को भी लागू किया है।

गोरखपुर, प्रयागराज में कठोर उपायों की कमी

गोरखपुर और प्रयागराज में अधूरे बुनियादी ढांचे के उन्नयन और प्रदूषण नियंत्रण नियमों के कम कठोरता से पालन न के कारण हवा में सुधार की प्रगति धीमी रही। गोरखपुर में तेजी से औद्योगीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या और अनुचित अपशिष्ट निपटान के अलावा बायोमास को खुले में जलाने से खासतौर पर मानसून के बाद प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हुई है। प्रयागराज में कुंभ मेले के आसपास के महीनों के दौरान निर्माण गतिविधियों में वृद्धि, यातायात में वृद्धि और धूल ने पीएम 10 का स्तर बढ़ाया है।

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