{"_id":"5fd4e47f4ba29279be459cfd","slug":"uttar-pradesh-government-challenged-dr-kafeel-bail-in-supreme-court-high-court-decision","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"डॉ. कफील की हिरासत रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉ. कफील की हिरासत रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
Sat, 12 Dec 2020 09:10 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 12 Dec 2020 09:10 PM IST
विज्ञापन
डॉ कफील खान (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत डॉ. कफील खान की हिरासत को रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। राज्य सरकार का कहना है कि डॉ. कफील का अपराध करने का पुराना इतिहास रहा है।
यही वजह है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। उन्हें नौकरी से निलंबित किया गया। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उन पर रासुका तक लगाया गया।
याचिका में कहा गया है कि डॉ कफील को यह जानकारी देने के बाद भी कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के आसपास धारा-144 लागू है और हाईकोर्ट ने भी एएमयू के 100 मीटर के दायरे में धरने व रैली पर रोक लगा रखी है।
विज्ञापन
बावजूद इसके डॉ. कफील ने वहां जाकर छात्रों को संबोधित किया और भड़काऊ भाषण दिया और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। राज्य सरकार का कहना है कि डॉ. कफील के उस भड़काऊ भाषण का ही नतीजा था कि 13 दिसंबर 2019 को एएमयू के करीब 10000 छात्रों ने अलीगढ़ शहर की ओर मार्च करना शुरू किया था।
विज्ञापन
यही वजह है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। उन्हें नौकरी से निलंबित किया गया। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उन पर रासुका तक लगाया गया।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि डॉ कफील को यह जानकारी देने के बाद भी कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के आसपास धारा-144 लागू है और हाईकोर्ट ने भी एएमयू के 100 मीटर के दायरे में धरने व रैली पर रोक लगा रखी है।
विज्ञापन
बावजूद इसके डॉ. कफील ने वहां जाकर छात्रों को संबोधित किया और भड़काऊ भाषण दिया और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। राज्य सरकार का कहना है कि डॉ. कफील के उस भड़काऊ भाषण का ही नतीजा था कि 13 दिसंबर 2019 को एएमयू के करीब 10000 छात्रों ने अलीगढ़ शहर की ओर मार्च करना शुरू किया था।
अगर पुलिस उन हिंसक छात्रों को समझा-बुझाकर नहीं रोकती तो वहां कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका थी। राज्य सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला सही नहीं है।