बारिश पर सोशल मीडिया पर लोग ले रहे चुटकी: कहा- दिल्ली में समुद्र की कमी हुई पूरी, तो दूसरा बोला- रोड पर करेंगे राफ्टिंग
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि राजधानी के लोगों को पानी के कारण दोहरी समस्या का सामना करना पड़ता है। गर्मियों में उन्हें पीने का पानी नहीं मिलता तो बारिश में उचित जलनिकासी न होने के कारण जगह-जगह पर जलभराव से लोगों को परेशानी होती है। सरकार को इस वर्षा जल का संग्रह कर लोगों की प्यास बुझाने का काम करना चाहिए।
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दिल्ली में पिछले दो दिनों से जबरदस्त बारिश हो रही है। जगह-जगह पर पानी भर गया है और सड़कों पर जलभराव के कारण चलना दूभर हो गया है। इस परेशानी में भी सोशल मीडिया पर लोग खूब चुटकुले बना रहे हैं। बसों में पानी भरने पर एक भाजपा नेता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने दुनिया की पहली वाटर बस की सुविधा प्रदान की है। अब लोग बसों में चलते हुए भी पानी में रहने का मजा ले सकते हैं। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा कि दिल्ली में समुद्र के न होने की कमी पूरी हो गई है।
दिल्ली भाजपा नेता प्रीती अग्रवाल ने एक फ्लाईओवर से पानी गिरने की वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि दिल्ली सरकार ने वर्ल्ड क्लास सिटी में गाड़ियों को धुलने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का इंतजाम किया है। अब आप यहां बिना किसी झंझट के अपनी कार धुलवा सकते हैं। वीडियो में फ्लाईओवर से गिरते पानी के नीचे कई गाड़ियां खड़ी हैं।
अनुराग मिश्रा ने टिप्पणी की है कि दिल्ली में हमें सबसे ज्यादा समुद्र की कमी महसूस होती थी। हमारे पास न तो समुद्र है और न ही कोई बड़ी नदी जहां जाकर हम पानी में आनंद ले सकें। लेकिन अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कृपा से दिल्ली की हर गली, मोहल्ला और सड़कें समंदर बन गई हैं। अब आप अपने घर से निकलते ही राफ्टिंग करते हुए निकल सकते हैं।
एक अन्य सोशल मीडिया यूजर स्वाती ने लिखा है कि पहले राफ्टिंग करने के लिए लोगों को हरिद्वार-ऋषिकेश जाना पड़ता था। थैंक्स टू केजरीवाल सर। अब हम अपने घर में ही राफ्टिंग का मजा ले सकते हैं।
पानी की ताकत का इस्तेमाल करे सरकार
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि राजधानी के लोगों को पानी के कारण दोहरी समस्या का सामना करना पड़ता है। गर्मियों में उन्हें पीने का पानी नहीं मिलता तो बारिश में उचित जलनिकासी न होने के कारण जगह-जगह पर जलभराव से लोगों को परेशानी होती है। सरकार को इस वर्षा जल का संग्रह कर लोगों की प्यास बुझाने का काम करना चाहिए। लेकिन उचित नीतियों के अभाव में यह काम नहीं कर पा रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में 1200 से ज्यादा तालाब हुआ करते थे। इनमें वर्षा जल संग्रह होने से सड़कों पर बाढ़ नहीं आती थी तो राजधानी का जलस्तर भी ऊंचा बना रहता था। इससे लोगों को पर्याप्त मात्रा में ग्राउंड वाटर भी मिल जाता था। लेकिन तालाबों की जमीन को अन्य कार्यों में इस्तेमाल कर लेने से हर गली-हर सड़क पर बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
योजना है, लेकिन चाल धीमी
दिल्ली सरकार ने दिल्ली के तालाबों को पुनर्जीवित करने का मिशन शुरू किया है। इसके अंतर्गत पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के कई तालाबों के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। सीलमपुर की एरिया में तालाबों का जीर्णोद्धार कर उन्हें पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। लेकिन इसकी गति बेहद धीमी है। जरूरत को ध्यान में रखते हुए यमुना के किनारे उपलब्ध जगहों पर बड़े जल संग्रह केंद्र विकसित किए जाने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।