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डेढ़ लाख में से सिर्फ 5500 को मिलती है किडनी
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 29 Jan 2014 03:28 PM IST
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प्रोस्टेट कैंसर से बचाव और इलाज के लिए नई तकनीक पर चर्चा करने के लिए बुध्ावार से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पांच दिवसीय सम्मेलन शुरू हो रहा है।
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कार्यक्रम में भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, नेपाल, बांग्लादेश सहित कई अन्य देशों के करीब तीन हजार चिकित्सक और विशेषज्ञ भाग लेंगे। यह सम्मेलन दो फरवरी तक चलेगा।
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सम्मेलन के आयोजन सचिव और राम मनोहर लोहिया अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉक्टर राजीव सूद ने बताया कि इस दौरान बीमारी से बचाव और शुरुआत में ही इसके लक्षणों को जानकर इलाज देने पर चर्चा होगी। पहले दिन एक लाइव कार्यशाला होगी। जिसके तहत 3डी में रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को प्रदर्शित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भारत में डेढ़ लाख से अधिक क्रोनिक किडनी रोग के मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत है लेकिन अंगदाताओं की कमी से 5500 जरूरतमंदों का ही किडनी प्रत्यारोपण हो पाता है। सम्मेलन में मूत्र रोग विशेषज्ञों और आम लोगों को स्वैच्छिक मृतक अंगदान को बढ़ावा देने को प्रेरित किया जाएगा।
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बताया कि फेफड़ों के कैंसर के बाद दूसरा सबसे अधिक होने वाला रोग प्रोस्टेट कैंसर है। दुनिया कैंसर के कारण होने वाली 76 लाख मौतों में से हर छह में से एक मौत प्रोस्टेट कैंसर के कारण होती है।
डॉक्टर सूद ने यह भी कहा कि इस तरह का कोई अध्ययन अभी तक भारत में प्रकाशित नहीं हुआ है लेकिन इसी वैश्विक अध्ययन के परिणाम को भारत में माना जाता है। अध्ययन के मुताबिक, हर वर्ष प्रोस्टेट कैंसर मरीजों की संख्या में एक फीसदी की वृद्धि हो रही है।