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Uphar Cinema Case: सबूतों से छेड़छाड़ मामले में अंसल भाइयों की बची सजा माफ, 2.25 करोड़ जुर्माने के आदेश पर राहत नहीं

Tue, 19 Jul 2022 05:42 PM IST
अनुराग सक्सेना पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Tue, 19 Jul 2022 05:42 PM IST
सार

निचली अदालत ने अंसल बंधुओं व उनके सहयोगियों को 1997 के उपहार सिनेमा आग से संबंधित एक मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ के लिए सात साल की जेल की सजा की सजा सुनाई थी। इस अग्निकांड में 59 लोगों की जान चली गई थी।

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Uphar Cinema Case Court releases Ansal brothers in tampering of evidence fine of 2.25 crore on each not waived
उपहार सिनेमा - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली की एक कोर्ट ने मंगलवार को उपहार सिनेमा कांड में सबूतों से छेड़छाड़ मामले में रीयल एस्टेट कारोबारी अंसल बंधुओं को रिहा करने के आदेश जारी कर दिए। इस मामले में अंसल बंधु सजा काट रहे हैं। साल 1997 में उपहार सिनेमा में हुए अग्निकांड में 59 लोगों की जान गई थी।

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एक मजिस्ट्रेट कोर्ट पिछले साल आठ नवंबर को अंसल भाइयों को सात साल जेल की सजा सुनाई थी, जबसे वे सजा काट रहे थे। जिला जल धर्मेश शर्मा ने अपने आदेश में हालांकि पूर्व में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा सुशील और गोपाल अंसल पर लगे 2.25-2.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश को बरकरार रखा।
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इससे पहले सोमवार को निचली अदालत ने अंसल बंधुओं व उनके सहयोगियों को 1997 के उपहार सिनेमा आग से संबंधित एक मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ के लिए सात साल की जेल की सजा की सजा सुनाई थी। इस अग्निकांड में 59 लोगों की जान चली गई थी। पटियाला हाउस स्थित जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने एक अनूप सिंह को छोड़कर सुशील और गोपाल अंसल सहित सभी आरोपी व्यक्तियों की अपील खारिज कर दी। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने सभी तथ्यों व साक्षों के आधार पर ही चारों को दोषी ठहराया था।
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मजिस्ट्रेट अदालत ने नवंबर 2021 में अग्नि त्रासदी मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में अंसल बंधुओं को सात साल की जेल और प्रत्येक को 2.25 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने अन्य दोषियों पीपी बत्रा, दिनेश चंद्र शर्मा और अनूप सिंह को समान जेल की सजा सुनाई गई, लेकिन प्रत्येक पर 3 लाख का जुर्माना लगाया गया। दोषियों ने बाद उन्होंने मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

उपहार त्रासदी के पीड़ितों की एसोसिएशन (एवीयूटी) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने अदालत को बताया कि अंतिम वांछित परिणाम केवल दस्तावेजों और अदालती रिकॉर्ड से छेड़छाड़ तक सीमित नहीं था, बल्कि सुशील अंसल, गोपाल को बरी करने के लिए था। अदालत ने अंसल के अलावा एच एस पंवार, अदालत के पूर्व कर्मचारी दिनेश चंद शर्मा और दो अन्य पीपी बत्रा और अनूप सिंह द्वारा दायर अपीलों पर भी आदेश सुरक्षित रखा, जिन्हें भी सात-सात साल की जेल की सजा और उन पर जुर्माना लगाया गया था। प्रत्येक पर तीन लाख रुपये।

अदालत ने अंसल पर 2.25 करोड़ रुपये का जुर्माना व अन्य पर तीन -तीन लाख रुपये जुर्माना लगाया था। मामला मुख्य अग्नि त्रासदी मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ से संबंधित है जिसमें अंसल को दोषी ठहराया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने 2 साल की जेल की सजा सुनाई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने हालांकि उन्हें जेल के समय को ध्यान में रखते हुए इस शर्त पर रिहा कर दिया कि वे राष्ट्रीय राजधानी में एक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपये जमा करवाएंगे।

आरोपपत्र के अनुसार, छेड़छाड़ किए गए दस्तावेजों में घटना के तुरंत बाद बरामदगी का विवरण देने वाला पुलिस मेमो, उपहार के अंदर स्थापित ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत से संबंधित दिल्ली फायर सर्विस रिकॉर्ड, प्रबंध निदेशक की बैठकों के मिनट और चार चेक शामिल हैं।

अदालत ने माना था कि अंसल बंधु थिएटर के दिन-प्रतिदिन के मामलों को संभाल रहे थे। प्रासंगिक समय, आरोप पत्र में कहा गया था।इसने कहा कि अंसल ने मुख्य मामले में बचाव किया था कि दिन-प्रतिदिन के कामकाज में उनकी कोई भागीदारी नहीं थी। 20 जुलाई 2002 को पहली बार छेड़छाड़ का पता चला और दिनेश चंद शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। उन्हें 25 जून, 2004 को निलंबित कर दिया गया और बर्खास्त कर दिया गया। 13 जून, 1997 को हिंदी फिल्म बॉर्डर की स्क्रीनिंग के दौरान उपहार सिनेमा में आग लग गई थी, जिसमें 59 लोगों की जान चली गई थी।

दिल्ली पुलिस ने भी तर्क रखा कि सिनेमा के मामलों पर अंसल बंधुओं का पूरा नियंत्रण था। वर्ष 1997 में हुई त्रासदी के बाद अदालत फाईल से सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का इरादा यह दिखाना कि वे उपहार सिनेमा मामलों के प्रबंधन में शामिल नहीं थे। ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि अदालत में मौजूद दस्तावेजों को गायब करने व छेड़छाड के पीछे उनका हाथ नहीं है। पुलिस ने कहा कि उपहार सिनेमा का प्रबंधन करने वाली कंपनी (अंसल क्लब लिमिटेड) से संबंधित बैठकों में भाग लेने के लिए चेक पर हस्ताक्षर किए और इस तरह के दस्तावेजों को दायित्व से बचने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया था।

उन्होंने कहा निचली अदालत ने सभी साक्ष्यों के आधार पर माना है कि अभियुक्तों के लिए दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने का एक मजबूत मकसद मौजूद था क्योंकि उन दस्तावेजों से पता चलता है कि अंसल बंधुओं का कंपनियों के मामलों का प्रबंधन था। वे दस्तावेजों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ से लाभान्वित है।

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