कुछ यूं अखिलेश राज में बन रहा युवाओं का भविष्य
मोबाइल के जरिए प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाने की बात भी सामने आई है। पर्चा बाहर पहुंचते ही साल्वर उसे हल करने में जुट गए और इसके बाद शुरू हुआ नकल सामग्री परीक्षा केंद्र के अंदर पहुंचाने का प्रयास।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं बृहस्पतिवार से शुरू हो गईं, लेकिन इस दौरान व्यवस्था पूरी तरह से फेल रही। तमाम दावों के बाद भी नकल माफिया के हौसले बुलंद दिखे।
स्थिति यह रही कि हिंदी जैसे विषय की परीक्षा में प्रदेश में पहले दिन पहली पाली में ही 77 नकलची धरे गए। उधर, उन्नाव में प्रवेश पत्र न मिलने से क्षुब्ध शुक्लागंज निवासी सूरज कुमार ने फांसी लगाकर जान दे दी।
परिजनों ने विद्यालय प्रबंधक पर प्रवेश पत्र के नाम पर 15 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है। पुलिस ने प्रबंधक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर लिया है। वैसे तो शिक्षा विभाग ने नकल माफिया पर नकेल कसने के निर्देश दिए थे, लेकिन पहले दिन ऐसा कुछ होता नहीं दिखा।
नकल करते पकड़ा तो फाड़ी उत्तर पुस्तिका
कृषक इंटर कालेज में नकल करते हुए पकड़े जाने पर एक परीक्षार्थी निरीक्षक से भिड़ गया। निरीक्षक ने उत्तर पुस्तिका नत्थी करने की प्रक्रिया शुरू की तो उसने उत्तर पुस्तिका छिन ली और उसे फाड़ दिया। इसके बाद वह कॉलेज भाग निकला, लेकिन गेट बंद होने के कारण स्टाफ ने उसे पकड़ लिया।
यूपी में प्रबंधन की अपनी सीमाएं हैं। राज्य में एक तरह के विद्यालय नहीं हैं। परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुपात में व्यवस्थात्मक सुधार नहीं हुए हैं। इसलिए शिक्षा, परीक्षा और दोनों की गुणवत्ता में समस्या रहती है।
- बीपी खंडेलवाल, पूर्व चेयरमैन सीबीएसई, पूर्व प्रमुख उ.प्र. बोर्ड