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Delhi NCR News: दहेज हत्या मामले में पति बरी, ठोस सबूत नहीं मिले
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2021 में अपने घर में फंदे से लटकी मिली थी अंजलि
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने पत्नी की आत्महत्या से जुड़े दहेज हत्या और प्रताड़ना के मामले में पति अनिल कुमार को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर पाया।
अनिल की शादी अंजलि से 28 अप्रैल 2018 को हुई थी। 26-27 जून 2021 की रात अंजलि घर में फंदे से लटकी मिली थी। आरोप था कि अंजलि को उसके ससुराल वाले दहेज के लिए परेशान करते थे, लेकिन अदालत में मृतका के मायके वाले बयान से पलट गए। मृतका की मां आशा और भाई सुदेश ने दहेज मांगने और प्रताड़ित किए जाने से इनकार किया। मां ने बताया कि बेटी बच्चे की मौत के बाद से मानसिक तनाव में थी। भाई राहुल ने भी कहा कि आरोपी ने कभी दहेज नहीं मांगा। पिता ने भी कहा कि बेटी ने किसी रकम या सामान की मांग के बारे में नहीं बताया था। अदालत ने कहा कि दहेज हत्या के लिए दहेज की मांग और मौत से पहले की प्रताड़ना के बीच स्पष्ट कड़ी साबित होना जरूरी है। मामले में किसी खास मांग, घटना या तारीख का ठोस प्रमाण नहीं मिला। केवल संदेह के आधार पर दोष साबित नहीं किया जा सकता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने पत्नी की आत्महत्या से जुड़े दहेज हत्या और प्रताड़ना के मामले में पति अनिल कुमार को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर पाया।
अनिल की शादी अंजलि से 28 अप्रैल 2018 को हुई थी। 26-27 जून 2021 की रात अंजलि घर में फंदे से लटकी मिली थी। आरोप था कि अंजलि को उसके ससुराल वाले दहेज के लिए परेशान करते थे, लेकिन अदालत में मृतका के मायके वाले बयान से पलट गए। मृतका की मां आशा और भाई सुदेश ने दहेज मांगने और प्रताड़ित किए जाने से इनकार किया। मां ने बताया कि बेटी बच्चे की मौत के बाद से मानसिक तनाव में थी। भाई राहुल ने भी कहा कि आरोपी ने कभी दहेज नहीं मांगा। पिता ने भी कहा कि बेटी ने किसी रकम या सामान की मांग के बारे में नहीं बताया था। अदालत ने कहा कि दहेज हत्या के लिए दहेज की मांग और मौत से पहले की प्रताड़ना के बीच स्पष्ट कड़ी साबित होना जरूरी है। मामले में किसी खास मांग, घटना या तारीख का ठोस प्रमाण नहीं मिला। केवल संदेह के आधार पर दोष साबित नहीं किया जा सकता।
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