उन्नाव कांडः एक साथ चलेगा पिता की हिरासत में मौत और फर्जी केस का मुकदमा
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दिल्ली की तीस हजारी अदालत के जिला जज धर्मेंद्र शर्मा ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में कथित मौत के मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर समेत दस अन्य के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।
दुष्कर्म पीड़िता के पिता को बेरहमी से पीटने और फर्जी तरीके से आर्म्स एक्ट में जेल भेजने के मामले में पूर्व में जेल गए माखी थाना प्रभारी व हल्का दारोगा समेत तीन पुलिस कर्मियों की मुश्किलें एकबार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने विधायक व इन तीनों पुलिस कर्मियों समेत 10 लोगों पर आरोप तय किए हैं। इससे पुलिस विभाग में खलबली है।
3 अप्रैल 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता की विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सेंगर ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बेरहमी से पिटाई की थी। विधायक के दबाव में पुलिस ने उसी के पास से तमंचा की बरामदगी दिखाकर उसी पर आर्म्स एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ठीक से इलाज कराए बिना ही उसे जेल भेज दिया। 8 अप्रैल को पिटाई से आई चोटों से पीड़िता के पिता की जेल में हालत बिगड़ी। जेल प्रशासन ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। उस वक्त हुई सीबीआई की जांच में पीड़िता के पिता को फर्जी तरीके से जेल भेजे जाने के मामले में माखी थाना प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया और बीट प्रभारी कामता प्रसाद सिंह पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया था। रायबरेली की घटना के बाद से सभी मामलों की सुनवाई दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में हो रही है। मंगलवार को दिल्ली कोर्ट ने विधायक उसके भाई समेत तत्कालीन माखी थाना प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया, दारोगा कामता प्रसाद व कांस्टेबल आमिर समेत दस पर आरोप तय कर दिए हैं। इस आदेश के बाद दागी पुलिस कर्मियों की मुश्किलें और बढ़ गई है।
जमानत पर हैं पुलिसकर्मी
जेल गए तत्कालीन एसओ अशोक सिंह भदौरिया व दारोगा कामता प्रसाद वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं। इन्हें बहाल भी कर दिया गया है। वर्तमान में दोनों पुलिस कर्मियों की लाइन में ही तैनाती है।
ये पुलिस कर्मी हुए थे निलंबित
दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पिटाई और मौत के मामले में सफीपुर के तत्कालीन सीओ कुंवर बहादुर सिंह, एसओ अशोक सिंह भदौरिया, दारोगा केपी सिंह, हेडकांस्टेबल रामराज शुक्ला, कांस्टेबल लक्ष्य कुमार शुक्ला, मोहित कुमार, आमिर व अशोक सेन को निलंबित किया गया था।
पीड़िता के परिवार पर दर्ज मुकदमों में दखल नहीं देगा सुप्रीम कोर्ट
चर्चित उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता और उसके परिजनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज मुकदमों की जांच में सुप्रीम कोर्ट ने कोई दखल देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा कि वह इस बारे में उत्तर प्रदेश सरकार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश नहीं देगी।
जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह इस मामले का दायरा नहीं बढ़ाना चाहते हैं। बता दें कि पीड़िता और उसके परिजनों के खिलाफ 20 मुकदमे दर्ज हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी गई कि उन्नाव मामले से जुड़े चार मुकदमों का ट्रायल दिल्ली की विशेष अदालत में रोजाना चल रहा है। अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।