'अनूठा दिन होगा जब मुवक्किल तय करेगा कि कौन होगा उसके मामले में जज’
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1984 दंगों के मामले की सुनवाई दूसरे जज के पास स्थानांतरित करने के मामले की मांग संबंधी तर्क पर हाईकोर्ट ने एक बार फिर नाराजगी जताई है।
अदालत ने कहा वह दिन अद्वितीय होगा जब मुवक्किल तय करेगा कि उसके मामले की सुनवाई कौन जज करेगा। न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति पीएस तेजी की खंडपीठ ने पूर्व सांसद व दंगों के मामले में आरोपी रहे सज्जन कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि वह इतिहास में एक अनूठा दिन होगा, जब मामले में लिप्त पक्ष जज का सुनवाई के लिए चयन करेगा।
खंडपीठ सज्जन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उन्होंने न्यायमूर्ति तेजी की विश्वनीयता पर सवाल उठाते हुए उन पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाते हुए दंगों से संबंधित मामले की सुनवाई दूसरी अदालत में स्थानांतरित की मांग की है।
केस स्थानांतरित करने की याचिका पर हाईकोर्ट नाराज
पीठ ने कहा यह मामला वर्ष 1984 का है और दंगों से पीड़ित एक लंबे समय से न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि मामले को दूसरी अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो इंतजार और लंबा हो जाएगा।
अदालत ने कहा कि इस प्रकार के आवेदन हर मुश्किल मामले में आजकल दायर किए जा रहे हैं, लेकिन याचिकाकर्ता यह नहीं समझते कि इस तरह के प्रयास से कितना न्यायिक समय बर्बाद होता है।
कोर्ट ने कहा कि कुछ मामले तो 1984 के दंगों से भी अधिक पुराने हैं। इन मामलों में पीड़ितों को अभी भी न्याय का इंतजार है। खंडपीठ 1987 में हुए हाशिमपुरा नरसंहार के मामले की भी सुनवाई कर रही है।