{"_id":"5d3734a58ebc3e6d0f40d963","slug":"union-minister-hardeep-singh-puri-attack-on-arvind-kejriwal-about-unauthorized-colonies-in-delhi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अनधिकृत कॉलोनियों पर एक महीने में कैबिनेट में प्रस्ताव का केजरीवाल का बयान गलत: हरदीप पुरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनधिकृत कॉलोनियों पर एक महीने में कैबिनेट में प्रस्ताव का केजरीवाल का बयान गलत: हरदीप पुरी
Tue, 23 Jul 2019 09:54 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 23 Jul 2019 09:54 PM IST
विज्ञापन
हरदीप सिंह पुरी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के मामले में केंद्र व दिल्ली सरकार नए सिरे से एक-दूसरे के सामने हैं। केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस मसले में गलत बयान दे रहे हैं।
कॉलोनियों को नियमित करने का कोई प्रस्ताव तैयार करने की जगह दिल्ली सरकार ने सर्वे के लिए ही 2021 तक का समय मांगा है। हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, कॉलोनियों को नियमित करने में हो रही देरी को देखते हुए बीते मार्च में केंद्र सरकार ने उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था।
इसकी सिफारिशों के आधार पर कैबिनेट नोट का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसका प्रस्ताव दिल्ली सकार के पास भेजा गया है। एक महीने के भीतर कैबिनेट नोट को केंद्रीय कैबिनेट में पेश किया जाएगा। यहां से मंजूरी मिलने के बाद यह नोटीफाई होगा।
विज्ञापन
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल नवंबर 2015 में दिल्ली कैबिनेट से पास जिस प्रस्ताव की बात कर रहे हैं, वह अनधिकृत कालोनियों की पहचान के लिए 2008 में बनाए गए नियमों और 2007 के दिशा-निर्देशों में संशोधन से जुड़ा था। इसमें कालोनियों को अधिकृत करने जैसा कोई प्रस्ताव नहीं था।
विज्ञापन
कॉलोनियों को नियमित करने का कोई प्रस्ताव तैयार करने की जगह दिल्ली सरकार ने सर्वे के लिए ही 2021 तक का समय मांगा है। हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, कॉलोनियों को नियमित करने में हो रही देरी को देखते हुए बीते मार्च में केंद्र सरकार ने उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था।
विज्ञापन
इसकी सिफारिशों के आधार पर कैबिनेट नोट का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसका प्रस्ताव दिल्ली सकार के पास भेजा गया है। एक महीने के भीतर कैबिनेट नोट को केंद्रीय कैबिनेट में पेश किया जाएगा। यहां से मंजूरी मिलने के बाद यह नोटीफाई होगा।
विज्ञापन
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल नवंबर 2015 में दिल्ली कैबिनेट से पास जिस प्रस्ताव की बात कर रहे हैं, वह अनधिकृत कालोनियों की पहचान के लिए 2008 में बनाए गए नियमों और 2007 के दिशा-निर्देशों में संशोधन से जुड़ा था। इसमें कालोनियों को अधिकृत करने जैसा कोई प्रस्ताव नहीं था।
संधोधित नियमों के हिसाब से दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों का सर्वे करना था। जुलाई 2017 में दिल्ली सरकार ने केंद्र को बताया कि कॉलोनियों के टीएसएम सर्वे के लिए उसे दो साल का समय चाहिए।
आगे जनवरी 2019 में दिल्ली सरकार ने जानकारी दी कि सर्वे करने वाली एजेंसियां नाकाम रही हैं। टीएसएम की जगह दिल्ली की विकास विहार कॉलोनी का ड्रोन से सफल सर्वे किया गया है। दिल्ली सरकार अब इसी प्रक्रिया पर सर्वे करवाएगी। इसके लिए जनवरी 2021 तक का समय चाहिए होगा।
हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, साफ है कि मुख्यमंत्री न सिर्फ इस मसले पर गलत बयान दे रहे हैं, बल्कि अनधिकृत कॉलोनियों की बड़ी आबादी को बुनियादी सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है।
इससे बचने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2019 में उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी से बनी कमेटी को कॉलोनियों में संपत्तियों के मालिकाना हक की पहचान व खरीद-फरोख्त के लिए प्रक्रिया तय करनी थी। 11 जुलाई को कमेटी की अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। मंत्रालय इसकी सिफारिशों के आधार पर कैबिनेट नोट का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। एक बार कॉलोनियों के नियमित होने पर दिल्ली में तेजी से विकास कार्य संभव होगा।
आगे जनवरी 2019 में दिल्ली सरकार ने जानकारी दी कि सर्वे करने वाली एजेंसियां नाकाम रही हैं। टीएसएम की जगह दिल्ली की विकास विहार कॉलोनी का ड्रोन से सफल सर्वे किया गया है। दिल्ली सरकार अब इसी प्रक्रिया पर सर्वे करवाएगी। इसके लिए जनवरी 2021 तक का समय चाहिए होगा।
हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, साफ है कि मुख्यमंत्री न सिर्फ इस मसले पर गलत बयान दे रहे हैं, बल्कि अनधिकृत कॉलोनियों की बड़ी आबादी को बुनियादी सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है।
इससे बचने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2019 में उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी से बनी कमेटी को कॉलोनियों में संपत्तियों के मालिकाना हक की पहचान व खरीद-फरोख्त के लिए प्रक्रिया तय करनी थी। 11 जुलाई को कमेटी की अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। मंत्रालय इसकी सिफारिशों के आधार पर कैबिनेट नोट का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। एक बार कॉलोनियों के नियमित होने पर दिल्ली में तेजी से विकास कार्य संभव होगा।
मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी से 2008 में अनधिकृत कॉलोनियों की कटऑफ डेट तय की गई। इसके अनुसार, कोई कॉलोनी अगर 31 मार्च 2002 तक अस्तित्व में आ गई हो और उसका 50 फीसदी हिस्सा 24 मार्च 2008 तक बस गया हो तो उसे अनधिकृत माना जाएगा।
इस हिसाब से दिल्ली में 1,797 कॉलोनियों की पहचान की गई। आगे इसमें संशोधन किया गया और कॉलोनियों के अस्तित्व में आने और 50 फीसदी की बसावट की तारीख एक जून 2014 व एक जनवरी 2015 कर दी गई है। सर्वे का कार्य पूरा न होने से 2007 के दिशा-निर्देश व 2008 के नियमों के हिसाब से तय कॉलोनियों को ही अनधिकृत माना गया है।
इस हिसाब से दिल्ली में 1,797 कॉलोनियों की पहचान की गई। आगे इसमें संशोधन किया गया और कॉलोनियों के अस्तित्व में आने और 50 फीसदी की बसावट की तारीख एक जून 2014 व एक जनवरी 2015 कर दी गई है। सर्वे का कार्य पूरा न होने से 2007 के दिशा-निर्देश व 2008 के नियमों के हिसाब से तय कॉलोनियों को ही अनधिकृत माना गया है।
कॉलोनियों की पहचान पुराने नियमों से
मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी से 2008 में अनधिकृत कॉलोनियों की कटऑफ डेट तय की गई। इसके अनुसार, कोई कॉलोनी अगर 31 मार्च 2002 तक अस्तित्व में आ गई हो और उसका 50 फीसदी हिस्सा 24 मार्च 2008 तक बस गया हो तो उसे अनधिकृत माना जाएगा।
इस हिसाब से दिल्ली में 1,797 कॉलोनियों की पहचान की गई। आगे इसमें संशोधन किया गया और कॉलोनियों के अस्तित्व में आने और 50 फीसदी की बसावट की तारीख एक जून 2014 व एक जनवरी 2015 कर दी गई है। सर्वे का कार्य पूरा न होने से 2007 के दिशा-निर्देश व 2008 के नियमों के हिसाब से तय कॉलोनियों को ही अनधिकृत माना गया है।
इस हिसाब से दिल्ली में 1,797 कॉलोनियों की पहचान की गई। आगे इसमें संशोधन किया गया और कॉलोनियों के अस्तित्व में आने और 50 फीसदी की बसावट की तारीख एक जून 2014 व एक जनवरी 2015 कर दी गई है। सर्वे का कार्य पूरा न होने से 2007 के दिशा-निर्देश व 2008 के नियमों के हिसाब से तय कॉलोनियों को ही अनधिकृत माना गया है।
टीएसएम सर्वे नहीं हुआ था कामयाब
केंद्र सरकार के आरोपों पर दिल्ली सरकार का कहना है कि उसने 2015 में अनधिकृत कॉलोनियों की पहचान के लिए संशोधनों को मान लिया था। इसके तहत कॉलोनी के लोगों को मालिकाना हक भी दिया जाना था।
दिल्ली सरकार का आरोप है कि संशोधनों के हिसाब से कॉलोनियों के लिए केंद्र ने पहले टोटल स्टेशन मशीन (टीएसएम) सर्वे की बात कही। इसके लिए जिन कंपनियों को टेंडर दिया गया, वे कामयाब नहीं हो सकीं।
दिल्ली सरकार शुरू से ही सेटेलाइट मैपिंग की बात कह रही थी। अब जाकर केंद्र इसके लिए तैयार हुआ है। हालांकि, दिल्ली सरकार का यह भी कहना है कि केंद्रीय मंत्री कुछ भी कह रहे हों, असल सवाल अनधिकृत कॉलोनियों के नियमित होने का है। इसके लिए दिल्ली सरकार हर स्तर पर केंद्र का सहयोग करने को तैयार है।
दिल्ली सरकार का आरोप है कि संशोधनों के हिसाब से कॉलोनियों के लिए केंद्र ने पहले टोटल स्टेशन मशीन (टीएसएम) सर्वे की बात कही। इसके लिए जिन कंपनियों को टेंडर दिया गया, वे कामयाब नहीं हो सकीं।
दिल्ली सरकार शुरू से ही सेटेलाइट मैपिंग की बात कह रही थी। अब जाकर केंद्र इसके लिए तैयार हुआ है। हालांकि, दिल्ली सरकार का यह भी कहना है कि केंद्रीय मंत्री कुछ भी कह रहे हों, असल सवाल अनधिकृत कॉलोनियों के नियमित होने का है। इसके लिए दिल्ली सरकार हर स्तर पर केंद्र का सहयोग करने को तैयार है।