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Delhi NCR News: शब्दों की बुनावट से जीवंत हुई डल्ला की दुनिया
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दास्तानगोई ने दर्शकों को हंसी व हैरत से भर दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर के सभागार में दास्तानगोई कलेक्टिव की प्रस्तुति दास्तान डल्ला अय्यारा ने सदियों पुरानी भारतीय कथावाचन परंपरा को जीवंत कर दिया। दो दास्तानगो मीरा रिजवी और उस्मान सिद्दीकी ने अपनी आवाज, अदायगी व शब्दों की ताकत से पूरे सभागार में अनेक पात्रों व घटनाओं की दुनिया रच दी।
यह कहानी बुद्धिमान व चालाक स्त्री डल्ला की है, जो गरीबी से लड़ने के लिए अपनी सूझ-बूझ व मक्कारी का सहारा लेती है। उसकी चालों के शिकार कभी बादशाह बनते हैं तो कभी कनीजें। हास्य व व्यंग्य से भरी यह दास्तान समाज व मानव स्वभाव की कई परतों को उजागर करती है। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी, संवादों की लय व किस्से की रोचकता ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। दास्तानगोई, जिसे हिंदुस्तान की सबसे पुरानी कथावाचन कलाओं में माना जाता है, केवल कहानी सुनाने की कला नहीं, बल्कि भाषा, कल्पना व अभिनय का अद्भुत संगम है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर के सभागार में दास्तानगोई कलेक्टिव की प्रस्तुति दास्तान डल्ला अय्यारा ने सदियों पुरानी भारतीय कथावाचन परंपरा को जीवंत कर दिया। दो दास्तानगो मीरा रिजवी और उस्मान सिद्दीकी ने अपनी आवाज, अदायगी व शब्दों की ताकत से पूरे सभागार में अनेक पात्रों व घटनाओं की दुनिया रच दी।
यह कहानी बुद्धिमान व चालाक स्त्री डल्ला की है, जो गरीबी से लड़ने के लिए अपनी सूझ-बूझ व मक्कारी का सहारा लेती है। उसकी चालों के शिकार कभी बादशाह बनते हैं तो कभी कनीजें। हास्य व व्यंग्य से भरी यह दास्तान समाज व मानव स्वभाव की कई परतों को उजागर करती है। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी, संवादों की लय व किस्से की रोचकता ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। दास्तानगोई, जिसे हिंदुस्तान की सबसे पुरानी कथावाचन कलाओं में माना जाता है, केवल कहानी सुनाने की कला नहीं, बल्कि भाषा, कल्पना व अभिनय का अद्भुत संगम है।
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