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जवानों की शहादत का कोई मोल नहीं, शहीद के परिवार को 1 करोड़ की मदद पर हो रहा विचार: गृहमंत्री

Thu, 25 Oct 2018 09:39 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Thu, 25 Oct 2018 09:39 PM IST
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Union Home Minister Rajnath Singh visit in Greater Noida
rajnath singh - फोटो : amar ujala

देश के लिए जान न्योछावर करने वाले जवानों की शहादत का कोई मोल नहीं होता। उनकी शहादत के बाद शहीद के परिवार को मुश्किलों से जूझना पड़ता है। परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिलनी चाहिए, इसके लिए सरकार प्रयासरत है। यह बात केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कही। वह बृहस्पतिवार को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के 57वें स्थापना दिवस पर ग्रेटर नोएडा स्थित 39 वाहिनी केंद्र पर जवानों को संबोधित कर रहे थे।

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राजनाथ सिंह के आईटीबीपी केंद्र में पहुंचने पर जवानों ने उन्हें सलामी दी। इसके बाद उन्होंने संबोधन में कहा कि आईटीबीपी का गठन 1962 में किया गया था। वर्तमान में यह बल 9000 से 18700 फीट की ऊंचाई पर स्थित चौकियों पर तैनात रहकर 3488 किमी लंबी भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा का काम कर रहा है। इसके अतिरिक्त यह बल नक्सल प्रभावित इलाकों के साथ-साथ आंतरिक व वीआईपी सुरक्षा ड्यूटियों में भी तैनात है।
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राजनाथ सिंह ने यहां 121 करोड़ रुपये की लागत से बने 200 बिस्तरों के अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल का भी उद्घाटन किया, जिसका संचालन आईटीबीपी के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि उत्तरी कमान पर स्थित आईटीबीपी की चौकियों पर जरूरी सामान एवं राहत सामग्री पहुंचाने में जवानों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए सरकार ने दो हेलीकॉप्टर आईटीबीपी को देने का निर्णय लिया है। गृहमंत्रालय ने ये प्रस्ताव पास कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने आईटीबीपी के केंद्रों पर फैमिली वेलफेयर सेंटर विकसित किए जाने की भी बात कही।

पांच को राष्ट्रपति और 23 को पुलिस पदक मिला

राजनाथ सिंह ने आईटीबीपी द्वारा नक्सल विरोधी अभियान, महिला सशक्तीकरण, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान एवं विश्व योग अभियान में सक्रिय भूमिका अदा करने पर प्रशंसा की। गृहमंत्री ने आईटीबीपी के जवानों को जीवन रक्षक पदक सहित 5 पदाधिकारियों को विशिष्ठ सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक तथा 23 पदाधिकारियों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक भी प्रदान किए गए।  इस मौके पर वार्षिक विषेशांक पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।     

मयूर अश्व और बघेरा श्वान को पदक से नवाजा
इस अवसर पर विशेष पदक की श्रेणी बीटीसी भानू से मयूर नाम के अश्व और 27वीं वाहिनी एएनओ (छत्तीसगढ़) से बघेरा नाम के श्वान (डॉगी) को नवाजा गया। बताया गया है कि मुधोल हाउंड प्रजाति के बघेरा ने इसी वर्ष छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र राजनंद में विस्फोट से पहले बारूदी सुरंग का पता लगाकर कई जवानों की जान बचाई थी। वहीं, मयूर अश्व कई स्तर की प्रतियोगिताओं में पहले स्थान पर रहकर पदक जीत चुका है। इसके अलावा 19वीं वाहिनी को सर्वश्रेष्ठ बॉर्डर बटालियन, 26वीं वाहिनी को सर्वश्रेष्ठ नॉन बॉर्डर बटालियन व 40वीं वाहिनी को सर्वश्रेष्ठ एएनओ वाहिनी घोषित कर शील्ड भेंट की गई।

जांबाजों ने किया हैरतअंगेज प्रदर्शन
आईटीबीपी की विभिन्न टुकड़ियों ने हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। परेड के बाद मोटरसाइकिलों और हथियारों के साथ साइलेंट वैपन ड्रिल-राइफल मैजिक के प्रदर्शन में शामिल रहे।

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