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Union Budget : खिल उठा दिल्ली-एनसीआर का खिलौना बाजार, उत्साहित उद्यमियों को बजट से खासी उम्मीदें
Sun, 02 Feb 2025 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 02 Feb 2025 05:51 AM IST
सार
उद्यमियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार की इस पहल से खिलौना निर्माण में तेजी आएगी। इससे चीन पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी खिलौनों का बाजार बड़ा होगा। खास बात यह कि भारत खिलौने के वैश्विक बाजार में अपनी दखल बढ़ा सकेगा।
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विस्तार
बजट में भारत को खिलौना उद्योग का ग्लोबल हब बनाने के मकसद से घोषित राष्ट्रीय योजना से दिल्ली-एनसीआर की खिलौना इंडस्ट्री खिल उठी। उद्यमियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार की इस पहल से खिलौना निर्माण में तेजी आएगी। इससे चीन पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी खिलौनों का बाजार बड़ा होगा। खास बात यह कि भारत खिलौने के वैश्विक बाजार में अपनी दखल बढ़ा सकेगा।
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केंद्रीय वित्त मंत्री के ‘वैश्विक खिलौना केंद्र’ बनाने के लिए राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना का प्रस्ताव पेश करने से दिल्ली-एनसीआर के खिलौना व्यापारियों के मन में उत्साह का संचार हुआ है। इससे क्लस्टरों, कौशलों और ऐसे विनिर्माण इको-सिस्टम के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरण अनुकूल खिलौने भी बनेगा और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। खिलौना उत्पाद के लिए अभी भी 90 प्रतिशत निर्भरता चीन पर है। इसमें खासकर इलेक्ट्रॉनिक पार्ट शामिल है। खिलौनों में लगने वाले इलेक्ट्रॉनिक पार्ट भारत में कम ही बनते है। लिहाजा इस बजट से उद्यमियों को उम्मीद है कि अब इलेक्ट्रॉनिक पार्ट भी केंद्र सरकार की मदद से स्वदेश में ही तैयार होगा।
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300-350 करोड़ का होता है व्यापार हर महीने एनसीआर में
दिल्ली खिलौनों का एक बड़ा मार्केट है। यहां से यूपी, हरियाणा, बिहार, हिमाचल समेत कमोबेश हर राज्य में खिलौना खरीदने व्यापारी पहुंचते है। सदर बाजार, करोल बाग, चांदनी चौक, करोल बाग है। छोटे स्केल पर यमुनापार के इलाके में इसका निर्माण होता है। जबकि मायापुरी में भी इसी फैक्टरियां हैं। एनसीआर के शहरों में कई जगहों पर खिलौने की फैक्ट्री है। एक अनुमान के अनुसार, इस इलाके से हर महीने 300 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होता है। बजटीय मदद मिलने से कारोबार 500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद कारोबारी जता रहे हैं। वहीं, पूरे इलाके में इस कारोबार का करीब 4,000 करोड़ रुपये का टर्न ओवर है।
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केंद्र सरकार के इस पहल से खिलौना उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। खिलौनों में इस दौरान ऑडियो-विडियो इपैक्ट का चलन बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक सामान चीन से मंगाना पड़ता है क्योंकि भारत में इसका निर्माण नहीं होता है। सरकार के इस पहल से बनने की शुरूआत होगी। 70 प्रतिशत ड्यूटी भी कम होगा। इस उद्योग से रोजगार भी बढ़ेगा। खिलौना उद्योग में 65 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार मिलता है। लिहाजा एनसीआर की महिलाओं का रोजगार बढ़ेगा।
-राजीव बत्रा, उपाध्यक्ष, द ट्वॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया