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लोन नहीं चुकाया, अब संतोष ग्रुप की संपत्तियां होंगी नीलाम
अमर उजाला, वसुंधरा
Updated Fri, 29 Jan 2016 01:06 AM IST
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हाउसिंग व अरबन डेवलपमेंट कारपोरेशन (हुडको) से मेडिकल कॉलेज और अस्पताल निर्माण के नाम पर लिए गए 75 करोड़ का लोन न चुका पाने के कारण संतोष ग्रुप की संपत्तियों पर नीलामी की तलवार लटक गई है।
संतोष ग्रुप के संचालक महाराजी एजुकेशनल ट्रस्ट की सिद्धार्थ विहार स्थित करीब 63 एकड़ जमीन समेत पांच अन्य संपत्तियों पर हुडको ने कब्जा ले लिया है।
ब्याज समेत रकम मिलाकर कुल करीब 455 करोड़ रुपये की वसूली के लिए हुडको पहले जमीन नीलाम करेगा। यदि जमीन की कीमत 455 करोड़ रुपये से कम मिलती है तो मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी नीलाम किया जाएगा।
महाराजी एजुकेशनल ट्रस्ट ने वर्ष 1995 में हुडको से 75 करोड़ रुपये का लोन अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज निर्माण के लिए लिया था।
इसके लिए ट्रस्ट ने बैंक के पास गाजियाबाद अंबेडकर रोड स्थित संतोष अस्पताल, प्रताप विहार स्थित मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, 10 एकड़ जमीन और 16 एचआईजी ड्यूप्लेक्स मकानों को बंधक रखा था।
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2002 में ट्रस्ट ने लोन की किस्तें चुकाना बंद कर दिया। इसके बाद बैंक ने ऋण वसूली अधिकरण में मामले की अपील की। अधिकरण के आदेश के बाद साल 2011 में हुडको ने सिद्धार्थ विहार स्थित 63 एकड़ जमीन का कब्जा ले लिया।
इस पर ट्रस्ट ने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 2015 को हुडको को सरफेसी एक्ट के अंतर्गत 455 करोड़ रुपये की वसूली करने के आदेश दे दिए। उधर, एजुकेशनल ट्रस्ट के फाउंडर परमशिवम महालिंगम से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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संतोष ग्रुप के संचालक महाराजी एजुकेशनल ट्रस्ट की सिद्धार्थ विहार स्थित करीब 63 एकड़ जमीन समेत पांच अन्य संपत्तियों पर हुडको ने कब्जा ले लिया है।
ब्याज समेत रकम मिलाकर कुल करीब 455 करोड़ रुपये की वसूली के लिए हुडको पहले जमीन नीलाम करेगा। यदि जमीन की कीमत 455 करोड़ रुपये से कम मिलती है तो मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी नीलाम किया जाएगा।
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महाराजी एजुकेशनल ट्रस्ट ने वर्ष 1995 में हुडको से 75 करोड़ रुपये का लोन अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज निर्माण के लिए लिया था।
इसके लिए ट्रस्ट ने बैंक के पास गाजियाबाद अंबेडकर रोड स्थित संतोष अस्पताल, प्रताप विहार स्थित मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, 10 एकड़ जमीन और 16 एचआईजी ड्यूप्लेक्स मकानों को बंधक रखा था।
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2002 में ट्रस्ट ने लोन की किस्तें चुकाना बंद कर दिया। इसके बाद बैंक ने ऋण वसूली अधिकरण में मामले की अपील की। अधिकरण के आदेश के बाद साल 2011 में हुडको ने सिद्धार्थ विहार स्थित 63 एकड़ जमीन का कब्जा ले लिया।
इस पर ट्रस्ट ने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 2015 को हुडको को सरफेसी एक्ट के अंतर्गत 455 करोड़ रुपये की वसूली करने के आदेश दे दिए। उधर, एजुकेशनल ट्रस्ट के फाउंडर परमशिवम महालिंगम से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।