फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   UGC Instructions to Universities strict implementation rules of Anti Ragging Regulation 2016

जाति सूचक शब्द बोला तो लगेगा एससी/एसटी एक्ट, यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र

Fri, 28 Jun 2019 09:52 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 28 Jun 2019 09:52 PM IST
विज्ञापन
UGC Instructions to Universities strict implementation rules of Anti Ragging Regulation 2016
ugc - फोटो : फाइल फोटो

विज्ञापन

किसी भी विद्यार्थी को जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी 750 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पत्र लिखकर एंटी रैगिंग रेगुलेशन 2016 के नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। मुंबई में पिछले दिनों मेडिकल छात्रा की मौत के बाद जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने की बात सामने आई थी।  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखा है। प्रो. जैन ने अपने पत्र में लिखा है कि आयोग ने 2011 से 2018 तक विश्वविद्यालयों को इस संबंध में नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। हालांकि कई उच्च शिक्षण संस्थान नियमों को सख्ती से लागू नहीं कर देते हैं। यदि कोई संस्थान या विश्वविद्यालय नियमों को लागू नहीं करता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। 

प्रो. जैन के मुताबिक, आयोग  के पिछले पत्रों में विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को एंटी रैगिंग रेगुलेशन नियम सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया था। एंटी रैगिंग रेगुलेशन 2009 को 2016 में संशोधित किया था। इसके तहत जातिसूचक के साथ-साथ क्षेत्र पर आधारित शब्दों का प्रयोग भी नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि यूजीसी एंटी रैगिंग रेगुलेशन 2016 में बिहारी, हरियाणवी, मोटी, पतली व जाति आधारित जैसे शब्दों को भी रैगिंग की श्रेणी में शामिल कर लिया था। 
विज्ञापन


30 दिनों में चार बिंदुओं पर मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट 
आयोग ने संस्थानों और विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक सत्र 2018-19 के तहत ऐसे मामलों की चार बिंदुओं पर एससी, एसटी व ओबीसी विद्यार्थियों की शिकायतों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। इसमें विवि को बताना होगा कि पिछले रेगुलेशन के आधार पर कमेटी गठित, शिकायतों के लिए वेबसाइट पर विशेष पेज, रजिस्ट्रार के पास जाति सूचक शिकायतों पर निपटारा किया गया है या नहीं, एक वर्ष में कुल शिकायत, कितने मामलों का निपटारा, किसी फैकल्टी के खिलाफ भी शिकायत या कार्रवाई हुई या नहीं, विवि में कोई एंटी रैगिंग सेल है या नहीं, किस प्रकार से शिकायतों का निपटारा किया जाता है आदि पर रिपोर्ट देनी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


विश्वविद्यालय को वेबसाइट पर विशेष पेज बनाना होगा 
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर एंटी रैगिंग या जातिसूचक शब्दों का प्रयोग न करने पर आधारित पेज तैयार करना होगा। इसी पेज पर विद्यार्थी ऑनलाइन एंटी रैगिंग, जातिसूचक या क्षेत्र पर आधारित शिकायत दे सकते हैं। इसके अलावा कुलपति, प्रिंसिपल या रजिस्ट्रार ऑफिस में भी सीधे शिकायत लेने का प्रावधान करना होगा। संस्थानों को अपनी फैकल्टी पर भी नजर रखी होगी। इसके अलावा ऐसे मामलों के निपटारे के लिए फैकल्टी सदस्यों की टीम बनाने को कहा है, जोकि ऐसी घटनाओं व गतिविधियों पर नजर रखेगी। यदि कोई फैकल्टी इस मामले में आरोपी हो तो भी उसके खिलाफ कार्रवाई करें। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed