उबर रेप: 'पीड़िता के क्यों हैं अलग-अलग बयान'
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उबर कैब रेप केस में शुक्रवार को बचाव पक्ष ने अंतिम जिरह करते हुए कहा कि पीड़िता ने कैब बुलाने और उसमें बैठते समय के बारे में अपने तीन बयानों में अलग-अलग समय का जिक्र किया है।
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कावेरी बावेजा के समक्ष अंतिम जिरह को आगे बढ़ाते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि कैब बुक करने के समय के बारे में पीड़िता के अलग-अलग बयान दिया है।
जिस तरह से मामले की जांच की गई उससे लगता है कि आरोपी को सजा दिलाने के लिए अभियोजन व पुलिस ने मिलीभगत कर रखी है। पीसीआर कॉल रिकॉर्ड के मुताबिक पीड़िता ने रात 1.09 पर कॉल किया था और पुलिस को उस तक पहुंचने में एक घंटे से ज्यादा समय लग गया था।
इन खामियों का जिक्र किया है बचाव पक्ष ने
पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि पुलिस उसके पास 15-20 मिनट में पहुंच गई थी। पीड़िता का यह बयान कोर्ट में पेश दस्तावेज से अलग है। बचाव पक्ष ने कहा कि पीड़िता ने जिस मोबाइल नंबर से कथित दुष्कर्म के बाद पीसीआर बुलाई और मंगेतर को एसएमएस किया वह मोबाइल व सिम मंगेतर ने ही पीड़िता को दिया था।
जिन दस्तावेज को जमा कर यह सिम लिया गया है वह फर्जी हैं और पते अलग अलग हैं। पुलिस ने पीड़िता के मंगेतर का बयान दर्ज किया लेकिन उसका बयान अदालत में नहीं करवाया गया।
बचाव पक्ष ने कहा कि यह गवाह इसलिए अहम है क्योंकि यह पीड़िता के सिम से जुड़ा है। पीड़िता के मंगेतर ने खुद अपना मोबाइल व सिम पुलिस को दिया जिसके बाद उसकी सीडीआर निकाली गई। पुलिस ने उसका नाम गवाहों की सूची में नहीं डाला। ऐसे हालात में कैसे पता चलेगा कि वह नंबर फर्जी था या नहीं।