उबर रेप पीड़िता खुद अपना मोबाइल लेकर गई थी थाने
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उबर कैब रेप केस में जांच अधिकारी महिला एसआई की गवाही के साथ शनिवार को अभियोजन पक्ष की गवाही पूरी हो गई। अभियोजन ने 17 दिनों में 28 गवाहों की गवाही करवाई। विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी की गवाही के लिए 3 फरवरी की तारीख तय की है।
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कावेरी बावेजा के समक्ष शनिवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ता आलोक द्विवेदी ने जांच अधिकारी महिला एसआई रेणु सिंह से जिरह की।
जांच अधिकारी ने बताया कि पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी शिव कुमार यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एम) (पीड़िता की जान जोखिम में डालकर दुष्कर्म करना) की धारा जोड़ी गई थी।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पीड़िता को धमकाने व डराने के लिए उसका गला दबाया लेकिन पुलिस ने पीड़िता की गर्दन से आरोपी के फिंगर प्रिंट या पाम प्रिंट (हथेली की छाप) नहीं ली। इसके अलावा भी पुलिस की जांच में कई खामियां जिरह के दौरान उजागर हुईं।
पीड़िता ने मोबाइल खुद जमा कराया था
रेणु ने कहा कि पीड़िता व उसके मित्र का मोबाइल घटना के फौरन बाद सीज नहीं किया गया। पीड़िता ने अपना मोबाइल 8 दिसंबर को थाने आकर पुलिस को दिया जबकि उससे दुष्कर्म 5 व 6 दिसंबर की रात हुआ था।
घटना वाली रात पीड़िता के मित्र के मोबाइल से उबर कैब बुक हुई थी। लेकिन पुलिस ने मोबाइल भी सीज नहीं किया था। उसने 15 दिसंबर को मोबाइल खुद थाने में जमा करवाया था।
वहीं, चार्जशीट में शामिल 44 गवाहों में से केवल 28 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। पुलिस ने 16 गवाहों को गैर जरूरी समझकर ड्रॉप कर दिया।