उबर ने दायर की याचिका, केंद्र व दिल्ली को नोटिस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उबर कैब ने केंद्र व दिल्ली सरकार की एजेंसियों पर उसे काम न करने देने का आरोप लगाया है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में उबर ने केंद्र व दिल्ली सरकार को उसके काम में रोकटोक करने से रोकने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। मुख्य न्यायमूर्ति जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंतनाथ की खंडपीठ ने उबर की याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने उबर की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने दिल्ली सरकार की रेडियो टैक्सी स्कीम 2006 को चुनौती दी थी।
उबर कंपनी नियमों का उल्लंघन डीजल वाहन चला रही है
हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नीदरलैंड की कंपनी उबर बीवी व उसकी भारतीय सहकंपनियों उबर इंडिया टैक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड व उबर इंडिया सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड ने दिल्ली सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उसे रेडिया टैक्सी संशोधित स्कीम 2006 के तहत (मोबाइल एप आधारित) टैक्सी सेवा चलाने के लिये लाइसेंस देने से इंकार कर दिया गया है।
बता दें कि उबर ने दिल्ली सरकार की संशोधित रेडियो टैक्सी स्कीम के तहत लाइसेंस के लिये आवेदन किया था। सरकार ने एक सितंबर को यह आवेदन खारिज करते हुये कहा था कि वह नई स्कीम के अंतर्गत लाइसेंस के लिये आवेदन करे।
याचिका पर बहस करते हुये दिल्ली सरकार के वकील ने कहा उबर कंपनी नियमों का उल्लंघन डीजल वाहन चला रही है। यह गैर कानूनी है इसलिये दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग व ट्रैफिक पुलिस उनके वाहन जब्त कर रही है।
दिल्ली सरकार व टैफिक पुलिस की कार्रवाई गैर कानूनी है
सरकार की दलीलों को खारिज करते हुये उबर के वकील ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (एआईटीपी) के तहत डीजल वाहनों के दिल्ली में परिचालन पर रोक नहीं लगाई है। उबर का तर्क था कि उनके पास एआईटीपी है और वह दिल्ली सरकार की नई स्कीम के तहत नहीं आते। ऐसे में दिल्ली सरकार व टैफिक पुलिस की कार्रवाई गैर कानूनी है।
उबर कैब चालक ने पांच दिसंबर 2014 को कैब में दुष्कर्म किया था और इसके बाद भारी हंगामा हुआ था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने एक जनवरी 2015 को अधिसूचना जारी कर संशोधित रेडियो स्कीम 2006 के तहत दिल्ली में चलने वाली सभी मोबाइल एप आधारित कैब के परिचालन पर रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट ने 29 जुलाई को कैब कंपनियों की याचिका खारिज करते हुये दिल्ली सरकार के आदेश का पालन करने व इसका उल्लंघन करने वाली कैब कंपनियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि दिल्ली में केवल वही कैब चलेंगी जो सीएनजी पर चलती हैं। हाईकोर्ट सिंगल बेंच के इस आदेश को ओला कैब ने ग्यारह अगस्त को याचिका दायर कर चुनौती दी थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।