यूपी में जमीन आवंटन घोटाले में दो IAS, पांच अफसर और चार बाबू फंसे
स्वर्ण जयंतीपुरम प्लाट आवंटन घोटाला:
दो आईएएस समेत कई पूर्व अफसरों पर शिकंजा, दो क्लर्क सस्पेंड
- हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जांच में आया कई पूर्व अफसरों का नाम
- कई आरोपियों की हो चुकी है मृत्यु, कई नौकरी से हो चुके हैं रिटायर
विस्तार
स्वर्ण जयंतीपुरम के 139 प्लाट आवंटन घोटाला प्रकरण में दो आईएएस जीडीए के पूर्व वीसी डीपी सिंह और पूर्व ओएसडी (वर्तमान में हमीरपुर के डीएम) आरपी पांडेय समेत कुल 5 अफसरों व चार बाबुओं की संलिप्तता सामने आई है।
आरोपियों में से 4 अब रिटायर हो चुके हैं, जबकि दो की मृत्यु हो चुकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शुरू की गई इस जांच के बाद दो बाबुओं को निलंबित कर दिया गया है। खास बात यह है कि इनमें से एक बाबू पहले से ही निलंबित चल रहा है।
इस बाबू पर आरोप है कि सपा सरकार बदलते ही उसने जीडीए की कई महत्वपूर्ण फाइलों को फेंक दिया था। जीडीए सचिव रविंद्र गोडबोले ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जांच में पता चला है कि प्लाट बहाली के नाम पर नियमों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया।
रामचरित्र और दीपक तलवार नामक क्लर्क ने भ्रामक आख्या देकर इस घोटाले को अंजाम दिया। पूरे प्रकरण में तत्कालीन मुख्य लिपिक उदय सिंह, जगदीश शर्मा, अनु सचिव अनिल राणा, तत्कालीन ओएसडी हीरालाल, आरपी पांडेय, तत्कालीन सचिव आरसी मिश्रा और तत्कालीन वीसी डीपी सिंह की भूमिका भी संदिग्ध मानी गई है।
2005 से 2007 के बीच हुआ खेल
इनमें से उदय सिंह और अनिल राणा की मृत्यु हो चुकी है, जबकि वीसी रहे डीपी सिंह, सचिव आरसी मिश्रा, ओएसडी हीरालाल व मुख्य लिपिक जगदीश शर्मा अब रिटायर हो चुके हैं। तत्कालीन ओएसडी आरपी पांडेय वर्तमान में हमीरपुर के डीएम हैं। सभी के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
स्वर्ण जयंतीपुर योजना में 269 प्लाट के गलत तरीके से की गई बहाली के मामले को राजेंद्र त्यागी ने उठाया था। हालांकि मंडलायुक्त की जांच में 139 प्लाट के आवंटन में गड़बड़ी मिली थी। जांच में पता चला कि कई छोटे प्लाट को पहले कैंसल किया गया।
फिर बहाली के नाम पर किसी अन्य जगह पर बड़ा प्लाट आवंटी को दे दिया गया। ऐसे मामले भी पकड़ में आए हैं जिनमें एक ही दिन पहले सस्ते दामों पर जीडीए ने आवंटी को रजिस्ट्री की, ठीक उसी दिन आवंटी ने प्लाट महंगे रेट पर किसी अन्य को बेच दिया।