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कृषि कानूनों के विरोध में खुर्जा से आए दो किसान भूख हड़ताल पर बैठे, एक ने तो जल भी त्यागा

Wed, 09 Dec 2020 07:45 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 09 Dec 2020 07:45 PM IST
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Two farmers from Khurja sit on hunger strike in protest against agricultural laws
भूख हड़ताल पर बैठे दो बुजुर्ग किसान - फोटो : amar ujala

कृषि कानूनों को लेकर किसान काफी गुस्से में हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर बुधवार किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। भारत बंद के बाद मंगलवार शाम से खुर्जा से आए एक बुजुर्ग किसान ने अन्न और जल त्याग कर भूख हड़ताल पर जाने का फैसला किया। वहीं उनको देखा-देखी खुर्जा के ही दूसरे किसान ने बुधवार से भूख हड़ताल पर बैठ गए। दोनों मुंह पर पट्टी बांधकर किसानों के बीच बैठे हैं। 

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हालांकि उनके ही बीच बैठे दूसरे किसानों ने उनको समझाकर भूख हड़ताल खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन दोनों इसके लिए तैयार नहीं है। दोनों का कहना है कि जब तक सरकार नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे।
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गांव फिरोजपुर, खुर्जा, बुलंदशहर से आए किसान सुदेश कुमार (72) ने बताया कि वह परिवार के साथ गांव में रहते हैं। गांव में इनकी 35 बीघा जमीन है। अभी के हालात में खेती से परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल हो रहा है। नए कृषि कानून से तो किसान बिल्कुल बर्बाद हो जाएगा।
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सुदेश ने बताया कि वह छह दिन पूर्व अपने घर से आंदोलन में आए थे। भारत बंद के बाद शाम से उन्होंने जल और अन्न दोनों त्याग दिए हैं। जब तक सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेगी तब तक वह ऐसे ही बैठे रहेंगे। खुर्जा से आए भूदेव प्रसाद शर्मा (70) ने बताया कि वह एक सप्ताह से अधिक समय से गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद हैं। सरकार को किसानों के हाल पर दया नहीं आ रही है, किसान ठंड में विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार सुनने को राजी नहीं है। सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए ही उन्होंने बुधवार से भूख हड़ताल शुरू की है। 


आंदोलन में मौजूद लोग सुदेश और भूदेव को भूख हड़ताल खत्म करने के लिए मनाने में जुटे हुए थे। उनका कहना था कि भूखे रहकर कोई लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है। लेकिन सुदेश और भूदेव उनकी बात मानने को तैयार नहीं थे।

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