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इस सीट को पाना चाहते हैं भाजपा के दो बड़े नेता, राजनाथ सिंह के बेटे की प्रतिष्ठा भी दांव पर
एसएस अवस्थी/अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 19 Jan 2017 12:07 AM IST
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विधानसभा चुनाव में नोएडा सीट एक तरह से प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठा वाली सीट बन गई है। यही कारण है कि चार दिन से नोएडा का प्रत्याशी घोषित नहीं हो पाया है। सूत्र बताते हैं कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह पुत्र पंकज सिंह को लड़ाना चाहते हैं।
वहीं, केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा अपने मन मुताबिक प्रत्याशी को लाने पर अड़े हैं। दोनों मंत्रियों के ताकतवर होने से केंद्रीय चुनाव समिति तीन बार बैठक करने के बाद भी नाम तय नहीं कर सकी है। ऐसे में वर्चस्व की लड़ाई में नोएडा की सीट राजनीति का अखाड़ा बन गई है।
दरअसल, चुनाव के वक्त जिले की राजनीति में यह चौथी घटना है कि प्रत्याशी को लेकर घमासान मचा है। जब गौतमबद्धनगर की 2009 में लोकसभा सीट बनी थी, उस वक्त प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह यहीं से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पहले से ही जिले की राजनीति में गहरी पैठ बना चुके डॉ. महेश शर्मा बाजी मार ले गए और खुद चुनाव लडे़ और राजनाथ सिंह को गाजियाबाद से लड़ना पड़ा।
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वहीं, केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा अपने मन मुताबिक प्रत्याशी को लाने पर अड़े हैं। दोनों मंत्रियों के ताकतवर होने से केंद्रीय चुनाव समिति तीन बार बैठक करने के बाद भी नाम तय नहीं कर सकी है। ऐसे में वर्चस्व की लड़ाई में नोएडा की सीट राजनीति का अखाड़ा बन गई है।
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दरअसल, चुनाव के वक्त जिले की राजनीति में यह चौथी घटना है कि प्रत्याशी को लेकर घमासान मचा है। जब गौतमबद्धनगर की 2009 में लोकसभा सीट बनी थी, उस वक्त प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह यहीं से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पहले से ही जिले की राजनीति में गहरी पैठ बना चुके डॉ. महेश शर्मा बाजी मार ले गए और खुद चुनाव लडे़ और राजनाथ सिंह को गाजियाबाद से लड़ना पड़ा।
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महेश शर्मा का बर्चस्व है चुनौती
हालांकि, उस चुनाव में डॉ. महेश शर्मा हार गए थे और राजनाथ सिंह ने गाजियाबाद से जीत दर्ज की थी। फिर जब 2012 में विधानसभा चुनाव हुए तो नोएडा विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ने के लिए राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह ने दावा किया, लेकिन टिकट नहीं मिला। तब डॉ. महेश शर्मा नोएडा से विधायक का चुनाव जीत गए थे।
इसके बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हुए तो भी राजनाथ सिंह चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट फिर डॉ. महेश शर्मा को ही मिला और जीते भी। राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। सूत्र बताते हैं डॉ. महेश शर्मा के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए पिछले दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान टीम के साथ सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।
अशोक प्रधान चार बार यहां से सांसद रहे, लेकिन डॉ. महेश शर्मा ने रणनीति के तहत उन्हें भाजपा में हाशिये पर धकेल दिया था, यही कारण था कि उन्होंने 2014 में सपा ज्वाइन कर ली थी।
इसके बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हुए तो भी राजनाथ सिंह चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट फिर डॉ. महेश शर्मा को ही मिला और जीते भी। राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। सूत्र बताते हैं डॉ. महेश शर्मा के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए पिछले दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान टीम के साथ सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।
अशोक प्रधान चार बार यहां से सांसद रहे, लेकिन डॉ. महेश शर्मा ने रणनीति के तहत उन्हें भाजपा में हाशिये पर धकेल दिया था, यही कारण था कि उन्होंने 2014 में सपा ज्वाइन कर ली थी।
नोएडा सीट को लेकर इस बार घमासान
भाजपा पश्चिमी यूपी की सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर चुकी है। दिल्ली से सटे नोएडा और साहिबाबाद पर नामों की घोषणा बाकी है। अब फिर राजनाथ सिंह नोएडा से बेटे पंकज सिंह को लड़ाना चाहते हैं। जबकि डॉ. महेश शर्मा चाहते हैं कि उनका प्रत्याशी होना चाहिए।
चार दिन बीत चुके हैं और तीन बार केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हो चुकी है, लेकिन निर्णय नहीं हो पा रहा है। सूत्र बताते हैं कि आरएसएस का भी इस सीट को लेकर दखल शुरू हो गया है। दोनों ताकतवर नेता होने से हाईकमान कोई बीच का रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है।
गुस्साए समिति के पदाधिकारियों ने नेताओं को भगाया
सूत्र बताते हैं कि बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति के पदाधिकारियों से टिकट मांगने वाले नेता मिलने पहुंचे थे, लेकिन गुस्साए पदाधिकारियों ने उन्हें वहां से भगा दिया। जैसे ही अन्य दावेदारों को पता चला तो वे वहां से खिसक लिए।
राजनीतिक ठिकाने का सवाल है
सूत्र बताते हैं कि देश की राजधानी के ठीक नजदीक गौतमबुद्धनगर से राजनीतिक ठिकाना बनाने का सवाल है। डॉ. महेश शर्मा चाहते हैं कि उन्होंने 35 साल रहकर यहां पर राजनीति जमाई है और उसे इतने सहज सेे किसी दूसरे के हवाले कैसे कर दें। जबकि राजनाथ सिंह चाहते हैं कि कई चुनावों में इधर-उधर जाकर लड़ रहे हैं, क्यों न नोएडा को ही ठिकाना बनाया जाए। हालांकि, दोनों नेताओं की तरफ से यही कहा जा रहा है कि टिकट देना केंद्रीय चुनाव समिति का अधिकार है।
चार दिन बीत चुके हैं और तीन बार केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हो चुकी है, लेकिन निर्णय नहीं हो पा रहा है। सूत्र बताते हैं कि आरएसएस का भी इस सीट को लेकर दखल शुरू हो गया है। दोनों ताकतवर नेता होने से हाईकमान कोई बीच का रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है।
गुस्साए समिति के पदाधिकारियों ने नेताओं को भगाया
सूत्र बताते हैं कि बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति के पदाधिकारियों से टिकट मांगने वाले नेता मिलने पहुंचे थे, लेकिन गुस्साए पदाधिकारियों ने उन्हें वहां से भगा दिया। जैसे ही अन्य दावेदारों को पता चला तो वे वहां से खिसक लिए।
राजनीतिक ठिकाने का सवाल है
सूत्र बताते हैं कि देश की राजधानी के ठीक नजदीक गौतमबुद्धनगर से राजनीतिक ठिकाना बनाने का सवाल है। डॉ. महेश शर्मा चाहते हैं कि उन्होंने 35 साल रहकर यहां पर राजनीति जमाई है और उसे इतने सहज सेे किसी दूसरे के हवाले कैसे कर दें। जबकि राजनाथ सिंह चाहते हैं कि कई चुनावों में इधर-उधर जाकर लड़ रहे हैं, क्यों न नोएडा को ही ठिकाना बनाया जाए। हालांकि, दोनों नेताओं की तरफ से यही कहा जा रहा है कि टिकट देना केंद्रीय चुनाव समिति का अधिकार है।