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Greater Noida: चीन के नागरिकों के साथ मिलकर साइबर ठगी करने वाले दो गिरफ्तार, इस ऐप का करते था उपयोग
Wed, 26 Feb 2025 09:08 PM IST
श्याम जी.
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
Published by: श्याम जी.
Updated Wed, 26 Feb 2025 09:08 PM IST
सार
ग्रेटर नोएडा में चीन के नागरिकों के साथ मिलकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी गिरोह बनाकर डिजिटल अरेस्ट, गेमिंग व ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना रहे थे।
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दो आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने चीन के नागरिकों के साथ मिलकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक बीएएलएलबी का छात्र और दूसरा 12वीं पास है। आरोपी गिरोह बनाकर डिजिटल अरेस्ट, गेमिंग व ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना रहे थे। इनके पास से 14 डेबिट व क्रेडिट कार्ड, चार लाख नकद, एक पैन कार्ड, तीन आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस, एक पासपोर्ट, सात मोबाइल फोन और साइबर ठगी के दस्तावेज बरामद किए हैं।
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एसटीएफ के अफसरों ने बताया कि 12 फरवरी को टीम ने गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मोहन सिंह, संयम जैन व अरमान के रूप में हुई थी। आरोपी चीन में बैठे साइबर ठगों को भारतीय नागरिकों के बैंक खाते उपलब्ध करा रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर टीम गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही थी। मंगलवार को नोएडा यूनिट की टीम ने सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र से गिरोह के सदस्य रोहन अग्रवाल निवासी लूकर गंज टीटीपी नगर प्रयागराज और हर्ष वर्धन गुप्ता निवासी संजय गांधी नगर कानपुर नगर को गिरफ्तार किया है। 28 वर्ष का हर्ष वर्धन कलिंगा यूनिवर्सिटी में बीएएलएलबी का छात्र है, जबकि 29 साल का रोहन 12वीं पास है।
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अफसरों ने बताया कि सट्टा खेलने के दौरान रोहन की मुलाकात कानपुर निवासी आमिर से हुई, जो कमीशन पर चीन के नागरिकों को भारतीय लोगों के बैंक खाते उपलब्ध कराता है। उससे काम सीखकर रोहन टेलीग्राम चैनल के माध्यम से चीन के नागरिकों के संपर्क में आ गया। उसने बड़ी संख्या में चीन के नागरिकों को खातों की जानकारी उपलब्ध कराई। दोनों आरोपी टेलीग्राम के माध्यम से चीन के नागरिकों के संपर्क में रहते थे। चीन के ठग बाहर से ही डिजिटल अरेस्ट व गेमिंग के माध्यम से लोगों के साथ साइबर ठगी कर रहे है। चीन के नागरिकों के लिए काम करने वाले लोग देश भर में फैले है। उनकी मदद से कंपनी या फर्म के करंट अकाउंट की जानकारी भी जुटा रहे थे।
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ऐप से पता चल जाता है खाता धारक के मोबाइल का ओटीपी
अफसरों ने बताया कि चीन के साइबर ठग बैंक खाता धारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को एक फोन में डालते थे। फिर उसमें चाइनीज ड्रेगेन मैसेज ऐप डाउनलोड करते है। इस ऐप की मदद से साइबर ठग खाता धारक के मोबाइल पर आने वाले ओटीपी को देख लेते हैं। फिर ऐप ऑटोमैटिक रूप से खाते से पैसा ट्रांसफर करने के लिए एपीआई टूल से जोड़ देता है। एपीआई टूल में एक खाते से दूसरे खाते में पैसा भेजने की सुविधा होती है। ठगी की धनराशि से क्रिप्टो करेंसी खरीदते थे। साथ ही डॉलर के रूप में भारत में गिरोह के सदस्यों का हिस्सा देते है।
रोहन के पास आ चुके है अब तक 3.49 करोड़
पूछताछ में रोहन ने एसटीएफ को बताया है कि नवंबर, 2024 से अब तक उसके खाते में 3.49 करोड़ रुपये आ चुके हैं, जो चीन के साइबर ठगों से मिले है। इस धनराशि को हवाले के माध्यम से नकद में बदलवा लेता था। आरोपी से 150 अकाउंट की जानकारी मिली है। जिनका प्रयोग साइबर ठगी के लिए किया जा रहा है। इन अकाउंट के खिलाफ यूपी के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, उड़ीसा, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में 471 से अधिक साइबर ठगी के मामले दर्ज है।