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बीस से तीस हजार में मिल जाती है मशीन गन

Thu, 11 Dec 2014 08:11 AM IST
Updated Thu, 11 Dec 2014 08:11 AM IST
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Twenty to thirty thousand is available at the machine gun.

राजधानी में तेजी से बढ़ते अपराध के ग्राफ को देखकर लगता है कि दिल्ली क्राइम कैपिटल बनती जा रही है। पिछले साल के मुकाबले इस साल राजधानी में अपराध 100 फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं। तेजी से बढ़ते अपराध के पीछे अवैध हथियारों का आसानी से उपलब्ध हो जाना एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

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धरपकड़ वाले हथियारों की बढ़ती संख्या भी इस ओर इशारा करती है। छोटे बदमाशों से लेकर ऑर्गेनाइज्ड ढंग से वारदात को अंजाम देने वाले इनका बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। बिहार के मुंगेर और मध्य प्रदेश के धार से सप्लायर राजधानी में बेहद कम दामों में ऑन डिमांड हथियार सप्लाई कर रहे हैं। जून 2014 में तो पुलिस ने मेड इन मुंगेर एके-47 गन पकड़ी थी।
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पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तमंचे (कट्टा) का चलन अब काफी पुराना हो गया है। बदमाश तमंचे के बजाय मैगजीन वाली देसी पिस्टल को तरजीह दे रहे हैं। जहां तक गुणवत्ता की बात है तो मुंगेर और धार के बने हथियार विदेशी पिस्टल को टक्कर दे रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर के सप्लायरों का मुंगेर और धार के अवैध हथियार बनाने वाले लोगों से सीधा संबंध है।
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यह लोग खुद जाकर हथियार ले आते हैं, जबकि कई बार इनके कूरियर (असलहा लाने वाला) भी इसे लेकर आते हैं। पकड़े गए सप्लायरों ने खुलासा किया है कि गिरोह जिस तरह के हथियारों की मांग करते हैं उन्हें बेहद कम दाम पर उपलब्ध करा दिया जाता है।

विदेशी असलहों को देते हैं टक्कर

Twenty to thirty thousand is available at the machine gun.
विदेशी असलहों को देते हैं टक्कर

बिहार के मुंगेर, मध्य प्रदेश के धार, खारगोन, खंडवा, बुरहानपुर, बखानी में बने हथियार इटली, यूएसए और ब्रिटेन में बने हथियारों को टक्कर देते हैं। ज्यादातर बरामद हथियारों पर विदेश की मोहर लगी हुई है, हालांकि बारीकी से जांच करने पर पता चल जाता है कि यह बिहार या मध्य प्रदेश में बने हुए हैं।

लाइसेंसी हथियार बेचने वालों से भी सांठगांठ
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2014 में पकड़े गए कुछ बदमाशों ने खुलासा किया था कि उनकी सांठगांठ लाइसेंसी हथियार बेचने वालों से भी होेती है। लाइसेंसी पिस्टल की आड़ में यह विक्रेता गोलियां और कारतूस बेचने में बड़ी हेरफेर करते हैं। इसी हेरफेर से वह अवैध हथियारों का धंधा करने वाले बदमाशों को गोलियां उपलब्ध कराते हैं, बाद में इसे गिरोह को दोगुने दामों पर बेच दिया जाता है। पुलिस लाइसेंसी हथियार बेचने वालों पर भी नजर रखे हुए है।

कौन-कौन से हथियार हो जाते हैं उपलब्ध
सप्लायर ऑन डिमांड गिरोह को हथियार उपलब्ध करा रहे हैं। रिवाल्वर, 9 एमएम, .32 बोर, .30 बोर, 7.65 एमएम, मशीनगन यहां तक कि एके-47 भी यह लोग बना लेते हैं। 6 जून 2014 को दिल्ली पुलिस ने मुजफ्फरनगर तीन लोगों को पकड़ उनके पास से एक एके-47 और 30 पिस्टल बरामद की थी। बदमाशों ने खुलासा किया था मुजफ्फरनगर के एक गैंग ने ऑर्डर देकर मुंगेेर से एके-47 बनवाई थी।

20 से 30 हजार में मशीनगन

पुलिस के अधिकारी ने बताया कि पकड़े गए बदमाशों ने खुलासा किया है कि रिवाल्वर के लिए 10 से 15 हजार, 9 एमएम, .32 बोर, .30 बोर, 7.65 एमएम की पिस्टल के लिए 20 से 30 हजार, मशीनगन और एके-47 के लिए एक से ढाई लाख रुपये तक ले लेते हैं।

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